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जैविक उत्पादों के नाम पर किसानों का हो रहा शोषण : आचार्य देवव्रत

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कुरुक्षेत्र। जैविक शब्द से आजकल लोगों को भ्रमित किया जा रहा है चाहे वो जैविक खेती हो या जैविक उत्पाद। अधिकांश लोग जैविक खेती को ही प्राकृतिक खेती समझ रहे हैं, जबकि जैविक खेती तो रासायनिक खेती से भी महंगी और नुकसानदायक है। उक्त विचार गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म का दौरा करने आए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में चल रहे संस्कार धाम गुजरात के वरिष्ठ अधिकारियों को प्राकृतिक और जैविक खेती में अंतर समझाते हुए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने व्यक्त किए।
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राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक और जैविक दोनों प्रकार की खेती किसानों के लिए मददगार नहीं है। रासायनिक खेती जहां भूमि को बंजर बनाती है तो वहीं जैविक खाद, जैविक दवाइयां और जैविक उत्पादों के नाम पर आज भी किसानों का शोषण हो रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में एक देशी गाय से 30 एकड़ की खेती की जाती है और खेत में डालने हेतु जीवामृत केवल पांच दिनों में तैयार हो जाता है। इसके लिए किसान को बाजार से कुछ भी खरीदने की जरूरत नहीं है, जबकि पानी की भी 50 प्रतिशत तक बचत होती है, खेत की जुताई और खरपतवार नियंत्रण पर अतिरिक्त खर्च नहीं होता। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव मनोज आहूजा ने भी मंत्रालय के अधिकारियों के साथ गुरुकुल फार्म का दौरा किया और प्राकृतिक कृषि के विस्तार को लेकर राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी से चर्चा की।
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सचिव मनोज आहूजा ने अधिकारियों को किसानों के खेतों में जाकर प्राकृतिक खेती के प्रसार-प्रसार को तीव्र गति प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों में प्राकृतिक खेती के माॅडल तैयार किए जाएं और गांवों में भी किसानों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग देकर उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया जाए, ताकि वे दूसरे किसानों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग दे सकें। इसके पश्चात उन्होंने गुरुकुल फार्म पर गन्ने से बनी गुड़ का भी स्वाद चखा।

वहीं गुरुकुल में पहुंचने पर ओएसडी टू गवर्नर डाॅ. राजेंद्र विद्यालंकार, प्रधान राजकुमार गर्ग, निदेशक ब्रिगेडियर डाॅ. प्रवीण कुमार, व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, डाॅ. हरिओम आदि ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इसके पश्चात संस्कार धाम से आए सभी अधिकारियों ने गुरुकुल धाम का भ्रमण किया।
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