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किसान आंदोलन को जन आंदोलन बनाने के लिए किसानों ने निकाला सद्भावना मार्च

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कुरुक्षेत्र। पुतले को चप्पल व जूते मारतीं महिलाएं। - फोटो : Kurukshetra
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किसान आंदोलन को जन आंदोलन बनाने और महंगाई व तीन कृषि कानून के विरोध में किसानों ने शनिवार को सद्भावना मार्च निकाला गया। किसानों ने भगवान परशुराम चौक पर महंगाई व केंद्र सरकार का पुतला भी फूंका। इस यात्रा में काफी महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान किसानों ने लोगों को बताया कि तीनों कृषि कानून लागू होने से मजदूर, व्यापारी व जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा किसानों ने पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस के बढ़ते दाम के खिलाफ भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
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सद्भावना मार्च स्थानीय अनाज मंडी से चलकर गुरुद्वारा बाउली साहिब, मॉडल टाउन, सरस्वती तीर्थ, मेन बाजार से होते हुए चौक पर पहुंचा। यहां किसानों ने कानून रद करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद ये मार्च अंबाला रोड से होते हुए अनाज मंडी में समाप्त हुआ। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी ग्रुप) के प्रेस प्रवक्ता प्रिंस वडैच ने बताया कि नए कृषि कानून से न केवल किसान बल्कि मजदूर व व्यापारी भी प्रभावित होंगे। सरकारी वितरण न होने से मजदूर प्रभावित होंगे। वहीं एमएसपी न होने से बिहार की तर्ज पर किसान व व्यापारी पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि तीन नए कानून को वापिस कराने की मांग को लेकर करीब चार महीने से दिल्ली के बॉर्डर पर डटे हुए हैं, लेकिन सरकार हठधर्मिता के चलते झुकने को तैयार नहीं है। अब सरकार ने किसानों व व्यापारियों को बर्बाद करने के लिए गेहूं खरीद पर नए नियम लागू कर दिए है। सरकार के गेहूं खरीद के नए नियमों के विरोध में 26 तारीख को किसानों की ओर से भारत बंद का आह्वान किया गया है। उन्होंने कहा कि एफसीआई गेहूं खरीद को लेकर नई शर्त लगा रही है जो कि किसानों को कतई मंजूर नहीं है। गेहूं खरीद की सामान्य शर्ते पांच दशकों से हैं, लेकिन नई शर्तों के तहत गेहूं का टोटा चार प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत तक कर दिया गया है। वहीं गेहूं में नमी दर 14 प्रतिशत से कम करके 12 प्रतिशत कर दी गई है। इसके अलावा मिट्टी व अन्य को चार प्रतिशत से शून्य कर दिया गया है, जो कि सीधे तौर पर एमएसपी को तोड़ने के लिए है। यह गेहूं खरीद को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा।
टोल प्लाजा पर धरना जारी
सैनी माजरा व थाना टोल प्लाजा पर किसानों का धरना जारी है। किसान संगठनों के आह्वान पर 23 मार्च को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव सिंह का शहीदी दिवस दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर मनाया जाएगा। एक दिन पहले 22 मार्च को सभी किसान जुलूस के रूप में दिल्ली कूच करेंगे। वहीं 26 मार्च को भारत बंद को लेकर रणनीति तय की गई।
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