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मेडिकल, आर्किटेक्चर और विधि को छोड़ पूरी उच्च शिक्षा का होगा एक नियामक

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नई शिक्षा नीति को कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक कई बड़े बदलाव किए गए हैं। मेडिकल, आर्किटेक्चर और विधि को छोड़ पूरी उच्च शिक्षा का एक नियामक होगा। इसके अलावा 10+2 सिस्टम के बजाय 5+3+3+4 का पैटर्न अपनाया जाएगा। नई शिक्षा नीति को लेकर शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने इसे बहुप्रतीक्षित और महत्वपूर्ण सुधार बताया है और कहा कि इन्हें जमीन पर उतारने की जरूरत है।
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नीति का लक्ष्य ‘‘भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति‘‘ बनाना : डॉ. नीता
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति डॉ. नीता खन्ना ने कहा कि पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति को 1986 में बनाया गया था और 1992 में संशोधित किया गया था। 34 साल बाद आई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत थी। नई शिक्षा नीति 2020 में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनमें शीर्ष विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस स्थापित करने की अनुमति देना, छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करना और संस्थानों की दिशा में एक बड़ा कदम शामिल है। इस नीति का लक्ष्य ‘‘भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति‘‘ बनाना है। 2040 तक, सभी उच्च शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य बहु-विषयक संस्थान बनना होगा।
नई शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान करना : डॉ. भगवान
केयू कुलसचिव डॉ. भगवान सिंह चौधरी ने नई शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार और मंत्रिमंडल के फैसले का स्वागत किया। कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के अंदर तीन साल से 18 साल तक के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अंदर रखा गया है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान करना है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य छात्रों को कला, मानविकी, विज्ञान, खेल और व्यावसायिक विषयों में अध्ययन करने के लिए लचीलेपन और विषयों की पसंद को बढ़ाना है।
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आत्मनिर्भर भारत को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी शिक्षा नीति : सुभाष
एबीवीपी ने नई शिक्षा नीति का स्वागत किया है। कुरुक्षेत्र विभाग प्रमुख सुभाष कलसाना ने कहा कि भारतीय मूल्यों के अनुरूप तथा वैश्विक मानकों पर खरा उतरने योग्य शिक्षा नीति की आवश्यकता देश को लंबे समय से थी, जिन बड़े सुधारों की आवश्यकता भारत की जनता लंबे समय से कर रही थी, उन सुधारों पर सरकार ने ध्यान दिया है। हम आशा करते हैं कि ये परिवर्तन करोड़ों की संख्या वाले भारतीय छात्र समुदाय के सपनों को पंख देगा।
नीति कौशल और ज्ञान के मिश्रण से स्वास्थ्य का सृजित करेगी माहौल : अरूण आश्री
जिला शिक्षा अधिकारी अरूण आश्री ने कहा कि यह नीति कौशल और ज्ञान के मिश्रण से स्वास्थ्य माहौल सृजित करेगी। इस नीति में कुछ ऐसे सुधार हैं जिनकी लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी। यह विभिन्न संकाय और विषयों के संयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी और इससे पठन-पाठन एवं विचारों तथा वास्तविक दुनिया में इनके उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
अगर पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए तो भी मिलेगा फायदा : प्रो. संजीव
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के प्रधान प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया गया है। इस सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और 3-4 साल के बाद डिग्री मिल जाएगी। यह विद्यार्थियों के हित में यह एक बड़ा फैसला है। इसके अलावा सभी निजी और सरकारी कॉलेज और विश्वविद्यालयों पर एक ही नियम लागू होंगे और एक ही बॉडी रेगुलेट करेंगी, जो सबसे अच्छी बात हैं। वे नई शिक्षा नीति का स्वागत करते हैं।
यह नीति युवा पीढ़ी को संस्कारों, संस्कृति और मातृभाषा से जोड़ेगी : डॉ. पूनिया
केयू के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने कहा कि सांस्कृतिक दृष्टि से अपनी जड़ों को जोड़ने का एक प्रयास है और प्रारंभिक दौर में जो मातृ भाषाओं को जोड़ने को लेकर जो कदम अब उठाया गया है। वह बहुत पहले उठाना चाहिये था। इससे हमारी युवा पीढ़ी संस्कारों, संस्कृति और मातृभाषा से जुड़ेगी। इसके अलावा जो हमारी युवा पीढ़ी में अंग्रेजी का खौफ खत्म हो जाएगा।
युवाओं को कौशल विकास में मिलेगा बढ़ावा : डॉ. परमेश
केयू शिक्षक एवं पूर्व कुटा प्रधान डॉ. परमेश कुमार का कहना है कि नई शिक्षा नीति शिक्षा के क्षेत्र में आपूर्ति और देश में उच्च शिक्षा के नियमन संबंधी जटिलताओं को दूर करेगी और सभी छात्रों के लिये समान अवसर प्रदान करेगी। इस नीति से बहुत सारे सुझाव दिये गए हैं। अगर इससे सही मायने में लागू किया गया तो उससे भारतीय शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। विद्यार्थियों के कौशल विकास में बढ़ावा मिलेगा।
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