प्रशासन के लाख प्रयासों के बाद भी खुले में शौच करने वालों पर नकेल नहीं कसी जा सकी है। यह हाल तब है, जबकि हाल ही में खुले में शौच पर रोकथाम लगाने को लेकर अधिकारियों की बैठक हुई थी।
गौरतलब है कि शाम होते ही पिपली-लाडवा हाईवे पर सड़क के दोनों तरफ गंदगी फैलाना शुरू कर देते हैं।
यह स्थिति कुछ दिनों से नहीं बल्कि कई वर्षों से बनी हुई है, लेकिन खुले में शौच करने वालों को न तो जिला प्रशासन और न ही सरकार के स्वच्छता अभियान की कोई चिंता है। वहीं, गुजरते वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को भी इससे असहजता होती है। उधर, प्रशासन के लिए सरकार के खुले में शौच न करने देने के आदेशों को यह स्थिति सरेआम ठेंगा दिखा रही है।
शेलर, ढाबों, फैक्ट्रियों के आसपास ज्यादा गंदगी
शेलर, ढाबों, फैक्ट्रियों में कार्यरत लेबर और ट्रक-टेंपो चालक-परिचालक शाम का इंतजार करते हैं। दिन ढलते ही इन लोगों का हाईवे के दोनों तरफ बैठना शुरू हो जाता है।
बीमारियों की बढ़ जाती आशंका
खुले में शौच जाने से बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मक्खी, मच्छर इस गंदगी पर बैठते हैं। फिर वही मानव के संपर्क मं आकर बीमारियां फैलाते हैं।
मानसिकता बदलने की जरूरत : जोगपाल
एडीसी राजेश जोगपाल ने कहा कि सरकार या अधिकारी हर समय लोगों के क्रियाकलापों पर नजर नहीं रख सकते। उन्हें अपनी मानसिकता में बदलाव लाना होगा। लोग ये क्यों भूल जाते हैं कि खुले में की गई गंदगी को अप्रत्यक्ष रूप से मक्खी, मच्छरों के माध्यम से वे खुद ग्रहण भी कर लेते हैं। पिपली-लाडवा हाईवे पर शेलरों, ढाबों, फैक्ट्रियों आदि से जुड़े लोगों और राहगीरों को खुले में शौच न करने के बारे में समझाने का प्रयास किया जाएगा।