शहर के बाजारों में अतिक्रमण फिर से हर व्यक्ति के लिए समस्या बन गया है। यह स्थिति अधिकारियों के संज्ञान में भी है, लेकिन अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन अभी कोई अभियान चलाने के मूड में नजर नहीं आ रहा। लॉकडाउन से पूर्व उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा के आदेश पर पूरे शहर में युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर शहर के बाजार और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था। अनलॉक होने पर फिर से बाजार कब्जे में आने लगे। शहर के मुख्य बाजारों में अब अतिक्रमणकारियों का बोलबाला है। सड़क किनारे जगह-जगह दुकान और फुटपाथी दुकानदारों ने कब्जा जमा लिया है, जिससे सड़क छोटी हो गई है। इससे आए दिन सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। बाजार के अधिकतर दुकानदार अपनी दुकान की सीमा से बाहर भी सामान रखे रहते हैं, जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। इससे सड़कों पर पैदल चलने वाले फुटपाथ पर पैर रखने की जगह नहीं बची है।
नगर परिषद के सामने ही अतिक्रमण
बाजार को अतिक्रमण मुक्त करने वाले अधिकारियों के खुद के दफ्तर के आगे अतिक्रमण है। यहां सड़क पर खड़े वाहनों के कारण भी हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। यदि शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए फिर से कोई अभियान चलता है तो उसकी शुरुआत नगर परिषद को अपने कार्यालय के पास से ही करनी चाहिए। इसके साथ ही अतिक्रमण को रोकने के लिए नप द्वारा बाजार में पीली पट्टी लगाई गई थी, लेकिन अब फिर इस पीली पट्टी से आगे दुकानदार सामान रखने लगे हैं।
प्रशासन की सुस्ती बना सबब : राजेंद्र
राजेंद्र पठानिया ने कहा कि मुख्य बाजार में भी पहले नालियों के ऊपर फुटपाथ हुआ करते थे, जो अब कहीं भी दिखाई नहीं देते। दुकानदारों ने फुटपाथ को दुकानों के अंदर लेकर उन्हें चौतरों को रूप दे दिया है। यह सारा प्रशासन की सुस्ती की वजह से हुआ है। बाजार में कई बार दो पहिया वाहन लेकर चलना भी लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। यहां तो पैदल चलने वाले लोगों का भी जाम लग जाता है।
जुर्माना करे प्रशासन : रविंद्र
शहरवासी रविंद्र ने कहा कि प्रशासन जरा सतर्क होगा तो हर उस दुकानदार को अपना सामान बाहर से समेटना होगा, जो दुकानों के बाहर अतिक्रमण किए बैठा है। प्रशासन सख्ती ही नहीं करता। कुछ ही दिनों की सख्ती से दुकानदारों को बदला जा सकता है। नगर परिषद उन लोगों पर जुर्माना ठोके जो सड़कों और अतिक्रमण करता है।
मिलीभगत से हो रहा अतिक्रमण : राजू
दुकानदार राजू ने कहा कि नगर परिषद के अधिकारियों की मिलीभगत से ही सड़कों पर अतिक्रमण किया जा रहा है। अगर अतिक्रमण मिलीभगत से नहीं होता तो अब तक दुकानदारों को कब तक जुर्माना ठोक दिया जाता और रेहड़ी वालों को यहां से खदेड़ दिया जाता। यहां फुटपाथ तो अब बचे नहीं, जबकि पैदल चलने वालों के लिए सड़कें भी छोटी पड़ गई हैं। यहां हर थोड़ी देर बाद जाम की स्थित उत्पन्न हो जाती है। थोड़ी थोड़ी देर में लगने वाला जाम लोगों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है।
पीली पट्टी लगाई जाए : सुरेंद्र
सुरेंद्र ने बताया कि लॉकडाउन से पहले अभियान चलाकर अवैध कब्जे हटवाए गए थे और नगर परिषद की ओर से बाजार में दुकानों के सामने पीली पट्टी लगाई गई थी। इस दौरान लोगों को चेतावनी भी दी गई थी कि वे अपना कोई भी सामान इस पीली पट्टी से आगे न रखें नहीं तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। इससे सड़कों पर दुकानदारों द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण से भी काफी राहत मिली थी। नगर परिषद को दोबारा से ऐसा ही करना चाहिए, ताकि पैदल चलने वाले लोगों को समस्या न आए।
रेहड़ी खड़ी करवा कर रहे कमाई : विनोद
विनोद ने अनुसार यहां एक तो फुटपाथ नहीं ऊपर से न दुकानदार रेहड़ी चालकों को अपनी दुकानों के आगे खड़ा करके अतिक्रमण करवा रहे हैं। कुछ दुकानदार स्वयं रेहड़ी लगाने वालों से हजार हजार रुपये लेते हैं। इससे जहां बाजार की यातायात व्यवस्था बिगड़ती है। वहीं, पैदल चलने वाले लोगों के हक से खिलवाड़ भी किया जा रहा है।
नप समझे जिम्मेवारी : विकास
विकास ने कहा कि फुटपाथ न होने की स्थिति में राहगीरों को बाजार में पैदल ही चलना पड़ता है, जबकि इस भीड़ भाड़ वाले बाजार में भी कई बार दोपहिया वाहन चालक पैदल चलने वाले राहगीरों को टक्कर मारकर घायल कर देते हैं। अगर नगर परिषद और पुलिस प्रशासन अपनी-अपनी जिम्मेवारी समझे और उसे एक दूसरे के तालमेल से निभाए तो पैदल चलने वाले लोगों को किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
नप चेयरपर्सन और अधिकारियों ने नहीं उठाए फोन
अतिक्रमण को लेकर जब नगर परिषद चेयरपर्सन उमा सुधा और जिला म्युंसिपल कमिश्नर नरेंद्र पाल मलिक को कई बार फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके साथ ही नप सचिव केएल बठला ने कहा कि इस बारे में म्युंसिपल कमिश्नर ही बता सकते हैं।