कुरुक्षेत्र। जैन (डीम्ड-टू-बी) यूनिवर्सिटी, कोच्चि की सिम्मी कुरियन ने शिक्षकों से पढ़ाने का तरीका बदलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अब केवल किताबों का ज्ञान देने के बजाय विद्यार्थियों में सोचने, सवाल पूछने और नए समाधान खोजने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। केयू के यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर और यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार सप्ताह के फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम के छठे दिन सिम्मी कुरियन ने ब्लूम टैक्सोनॉमी पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि शिक्षण पद्धति ऐसी हो जिससे विद्यार्थी उत्तर याद न करें, बल्कि विषय को समझकर विश्लेषण और नए विचार विकसित कर सकें। इससे पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और परिणाम आधारित शिक्षा अधिक प्रभावी बनती है। कार्यक्रम में केयू के आईक्यूएसी निदेशक तेजिंदर शर्मा ने मूल्य आधारित शिक्षा पर विचार रखे। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय की अंजलि मलिक ने शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। इस कार्यक्रम में विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों ने भाग लिया।