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शिक्षकों के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता विषयगत विशेषज्ञता जितनी महत्वपूर्ण : डॉ. मोनिका

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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चार-सप्ताहीय फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम के 10वें दिन चार अकादमिक सत्र आयोजित हुए। यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) ने इसका संयुक्त आयोजन किया। इसका उद्देश्य नवनियुक्त शिक्षकों में शोध, शिक्षण, नेतृत्व और व्यक्तित्व विकास कौशल बढ़ाना था। यह कार्यक्रम प्रो. अनिल मित्तल की देखरेख में चला। प्रथम सत्र में छह प्रतिभागियों के शोध कार्यों का मूल्यांकन किया गया। इनमें कचरा प्रबंधन, ट्यूबरक्लोसिस और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का दर्शन जैसे विषय शामिल थे। विशेषज्ञों ने शोध की गुणवत्ता और प्रस्तुतीकरण कौशल सुधारने के सुझाव दिए। द्वितीय सत्र में टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज, भिवानी की डॉ. मोनिका शर्मा ने भावनात्मक विकास पर व्याख्यान दिया।
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उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता विषयगत विशेषज्ञता जितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों को भावनात्मक संतुलन और प्रभावी संवाद के नैतिक सिद्धांतों की जानकारी दी। केरल विश्वविद्यालय, तिरुवनंतपुरम के प्रो. आर वसंतगोपाल ने तृतीय सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर व्याख्यान दिया। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान संस्कृति, नैतिकता और डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर बल दिया। चतुर्थ सत्र में प्रो. वसंतगोपाल ने नेतृत्व कौशल पर चर्चा की। उन्होंने प्रभावी नेतृत्व को शैक्षणिक संस्थान की प्रगति का आधार बताया। एक अच्छा नेता सहयोगात्मक वातावरण बनाकर नवाचार और सकारात्मक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देता है।
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