हिंदी हैं हम अमर उजाला के इस अभियान के तहत विद्वानों एवं हिंदी प्रेमियों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका का मानना है कि बिना मातृभाषा के कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता, जिन भी देशों ने प्रगति की है, उन्होंने अपनी मातृभाषा को अपनाया है और पूरा सम्मान दिया है। इसीलिए हमारे देश के नागरिकों को भी चाहिए कि वह अच्छे से हिंदी भाषा को सीखें और वार्तालाप व संवाद में हिंदी को अपनाए। हिंदी के प्रति हमें गौरव महसूस करना चाहिए। अच्छी हिंदी बोले और उच्चारण ठीक करें। हमारी प्राथमिकता हिंदी को सशक्त बनाने की होनी चाहिए।
मातृभाषा से ही मनुष्य सीखता है संस्कार व व्यवहार: स्वामी ज्ञानानंद
स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि मातृभाषा से ही हम संस्कार एवं व्यवहार सीखते हैं एवं अपनी संस्कृति से जुड़कर अपनी धरोहर आगे बढ़ाते हैं। किसी भी बात को प्रभावशाली तरीके से कहने के लिए मातृभाषा ही सशक्त माध्यम है। इसके अलावा जिस भी देश ने प्रगति की है, उन्होंने अपनी मातृभाषा में की है। हमारा मस्तिष्क मातृभाषा में ही सोचने के लिए सक्रिय होता है। जब हम किसी अन्य भाषा को अपनाते हैं और उसमें कोई अभिव्यक्ति करना चाहते हैं, तो हमारा मस्तिष्क उस भाषा में सोचता नहीं। दूसरी भाषा में हमारे विचार इनते सक्रिय नहीं होते, जब हमारा मस्तिष्क सक्रिय नहीं होगा, तो वास्तव में उसके प्रभाव से हट जाएगा। हिंदी के प्रति हमें गौरव महसूस करना चाहिए। अच्छी हिंदी बोले और उच्चारण ठीक करें। हमारी प्राथमिकता हिंदी को सशक्त बनाने की होनी चाहिए।
अपनी मातृभाषा का सम्मान जरूरी: रोशा
हिंदी प्रेमी एवं उद्योगपति अशोक रोशा ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और इसका सम्मान बेहद जरूरी है। इसका सम्मान करें और दूसरों को भी सिखाएं। हिंदी भाषा पर गर्व करने वाले भी बहुत हैं। पर जो हीनता और शर्म महसूस करते हैं उन्हें उनके खोल से बाहर निकालना बहुत जरूरी है। अपनी मातृभाषा,अपनी प्यारी सरल हिंदी बोलने में क्या शर्म।
मातृभाषा विश्व की अनुपम धरोहर: पंकज
हिंदी प्रेमी पंकज ने कहा कि जन्म से हम जो भाषा का प्रयोग करते है वही हमारी मातृभाषा है। सभी संस्कार एवं व्यवहार इसी के द्वारा हम पाते है। इसी भाषा से हम अपनी संस्कति के साथ जुड़कर उसकी धरोहर को आगे बढ़ाते है। मातृभाषा विश्व की एक अनुपम धरोहर है। हमें अपनी सभ्यता के एवं निष्ठा के बारे में सचेत रहना चाहिए और उसे प्रोत्साहित करना चाहिए।
अशोक रोशा।- फोटो : Kurukshetra
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज।- फोटो : Kurukshetra