संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी या महाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित होता है। इस दिन व्रत, पूजा और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस बार दुर्गा अष्टमी की तिथि को लेकर भ्रम बना हुआ था, क्योंकि तृतीया तिथि दो दिन पड़ने से नवरात्रि 10 दिनों की हो गई।
ऐसे में अष्टमी तिथि नवरात्रि के आठवें दिन नहीं, बल्कि नवम दिन पड़ रही है। पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि अष्टमी तिथि 29 सितंबर को शाम चार बजकर 31 मिनट पर प्रारंभ होकर 30 सितंबर मंगलवार को शाम छह बजकर छह मिनट तक समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर मंगलवार को मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस बार दुर्गा अष्टमी शोभन योग में पड़ रही है, जो कि शुभ योग माना जाता है।
दुर्गा अष्टमी के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:37 से 05:25 मिनट तक- स्नान व ध्यान के लिए उत्तम समय
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:47 से 12:35 मिनट तक-पूजा और शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ
निशिता काल मुहूर्त: रात्रि 11:47 से 12:35 मिनट तक-रात्रिकालीन पूजा के लिए उपयुक्त
पंडित बलराज कौशिक ने बताया कि नवरात्रि में कन्या पूजन विशेष रूप से अष्टमी और नवमी तिथियों को किया जाता है। इस बार कन्या पूजन 30 सितंबर मंगलवार को होगा। श्रद्धालु इस दिन नौ कन्याओं को आमंत्रित कर उन्हें भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लें। मां महागौरी अत्यंत शुभ्र वर्ण वाली देवी हैं। दुर्गा अष्टमी पर विधिवत स्नान कर षोडशोपचार विधि से मां महागौरी की पूजा करने से जीवन के सभी दोष समाप्त होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।