शिक्षक संघ कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुटा ने कुलपति कार्यालय के बाहर मांगों के चलते रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कुटा अध्यक्ष डॉ. परमेश कुमार ने किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने भाग लिया।
कुटा अध्यक्ष डॉ. परमेश कुमार ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन लंबे समय से यूनिवर्सिटी शिक्षकों की लंबित मांगों के प्रति भेदभाव कर रही है।
यही कारण है कि शिक्षकों को धरना और प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक माहौल नहीं बन पा रहा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी यूनिवर्सिटी प्रशासन का यही रवैया रहा, तो आंदोलन और भी उग्र हो सकता है। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी प्रशासन का कोई प्रतिनिधि प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों की मांगों की जानकारी लेने के लिए मौके पर नहीं पहुंचा।
इसके बाद कुटा कार्यकारिणी की बैठक धरना स्थल पर ही हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक शिक्षकों की सभी मांगें नहीं मान ली जातीं।
इस अवसर पर कुटा सह सचिव डॉ. कुलदीप सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ. राहुल गुप्ता, कुटा ईसी सदस्य, प्रो. एमएस जागलान, डॉ. जितेंद्र खटकड़, डॉ. विजय कुमार, डॉ. पंकज, डॉ. महेंद्र कुमार, डॉ. बलजीत सहारन, डॉ. फकीरचंद, डॉ. रमेश कैत, डॉ. किरण सिंह, डॉ. सुमन सिंह, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. दीप्ति, डॉ. हरदीप जोशी, डॉ. सोमवीर जाखड़, डॉ. मुकेंद्र कादियान, डॉ. महावीर रंगा, डॉ. विक्रम खरब, डॉ. रमेश घनघस आदि शिक्षक मौजूद थे।
यह हैं शिक्षकों की मांगें
कुटा सचिव डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि शिक्षकों के सलाना इंक्रीमेंट, बिना नेट पीएचडी शिक्षकों को पंाच इंक्रीमेंट देना, यूआईईटी के शिक्षकों को एमटेक के दो अग्रिम वेतन पिछली सर्विस के लाभ प्रदान करना, चौथे पे बैंड में सर्विस के दौरान पीएचडी की तीन अग्रिम वेतन वृद्धियां यूजीसी नियमों के अनुसार सेल्फ-सर्विस शिक्षकों को बजडेट में बदलना, रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए सिंगल विंडो सिस्टम करना, कैश (कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम) में प्रमेाशन, मेडिकल लीव के लाभांश देना, अर्न्ड लीव की संख्या 30 करना, शैक्षणिक कार्य के पांच दिन निर्धारित करना, पुरानी पेंशन स्कीम के लिए शिक्षकों को एक और मौका देना, चुनाव ड्यूटी से यूनिवर्सिटी शिक्षकों को दूर रखना, शिक्षकों के लिए सुरक्षा के लिए उचित प्रबंध करना, शिक्षकों के इंटरव्यू बार-बार न करना आदि उनकी मांगें हैं।