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लावारिस कुत्तों का एक और शिकार होने से लोगों में दहशत

Fri, 10 Feb 2017 12:17 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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कुत्तों का झुंड - फोटो : अमर उजाला
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कुरुक्षेत्र जिले के गांव लोहारा में हड्डारोड़ी में एक व्यक्ति की कुत्तों के हमले में मौत के तीन दिन बाद भी गांव में दहशत का माहौल है। मजदूरी कर घर लौट रहे व्यक्ति को 100-150 कुत्तों ने घेरकर बुरी तरह नोंच डाला था। इसके उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने पर लोगों ने हड्डारोड़ी पहुंचकर कुत्तों के कब्जे से शव को छुड़वाकर अंतिम संस्कार किया।
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घटना मंगलवार शाम की है। जैल सिंह (40) मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। वह गांव में खैरा मजदूरी करने के बाद शाम करीब साढ़े सात बजे पैदल ही घर लौट रहा था। गांव के पास ही स्थित हड्डारोड़ी के पास कुत्तों ने उसे घेर लिया और उसे बुरी तरह नोंच डाला। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सैकड़ों ग्रामीणों ने मिलकर कुत्तों से शव को छुड़वाया, जिसके बाद उसका संस्कार किया गया। जैल सिंह के रिश्तेदार कदम सिंह ने बताया कि वह मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था।

इस घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। हालात यह है कि गांव के साथ-साथ खेल स्टेडियम पर भी कुत्तों ने कब्जा किया हुआ है। खैरा की ओर से इस गांव में आने-जाने से भी लोग किनारा करने लगे हैं, वहीं खिलाड़ियों ने स्टेडियम में जाना ही छोड़ दिया है। ग्रामीणों की मानें तो इससे पहले भी वह कई लोगों को अपना निशाना बना चुके हैं तो वही लोगों के बाड़ों में बंधे पशुओं को भी नोंच चुके हैं। इससे कई मवेशी की मौत हो चुकी है तो वहीं अब लोग बाड़ों व खुले में बांधे जाने वाले पशुओं की रखवाली करने को भी मजबूर होने लगे हैं।    
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38 गांवों का है हड्डी रोड़ा      
कदम सिंह ने बताया कि यहां 38 गांवों का हड्डी रोड़ा है। जहां इन गांवों से मृत पशुओं को डाला जाता है। यहां पहले कुछ ही कुत्ते थे तो अब यहां सैकड़ों कुत्ते जमा हो चुके है। जो इतने खूंखार हो चुके हैं कि यहां से गुजरना किसी भी समय खतरे से खाली नहीं है।      
    
पूरा गांव दहशत में : जरनैल सिंह      
ग्रामीण जरनैल सिंह ने बताया कि पूरा गांव इन लावारिस कुत्तों की दहशत में है। गांव के लोग इस ओर जाने से कतराने लगे है तो वही कई बार यह कुत्तों हादसों को अंजाम दे चुके हैं। यहां तक कि ये कुत्ते गांव में भी घुस जाते हैं। इससे यहां बच्चे व महिलाएं ही नहीं युवा भी बाहर निकलने से बचते हैं।      
   
समीप ही है सीनियर सेकेंडरी स्कूल: अमरीक      
गांव के पूर्व सरपंच अमरीक सिंह ने बताया कि यहां से कुछ ही दूरी पर 12वीं तक का स्कूल है। इसके चलते भी यहां कोई दूसरा हादसा होने की आशंका होने से इनकार नहीं किया जा सकता। पूरे गांव को खतरा बना हुआ है। ग्रामीण गुरमीत सिंह का कहना है कि यहां लोगों में भय बना हुआ है। यहां तक कि पशुओं की भी लगातार रखवाली करनी पड़ती है। कई पशुओं को यह कुत्ते अपना शिकार बना चुके हैं।      
   
खिलाड़ियों ने स्टेडियम में आना छोड़ा       
ग्रामीणों ने बताया कि गांव लोहरा व खैरी के बीच में प्रदेश सरकार ने राजीव गांधी ग्रामीण खेल स्टेडियम बनाया हुआ है। लेकिन यहां किसी भी गांव के खिलाड़ी खेलने नहीं आ रहे। समीप ही हड्डी रोड़ा की जगह होने के चलते स्टेडियम पर कुत्तों ने कब्जा किया हुआ है। इसके चलते यहां कोई भी नहीं घुस पाता। खिलाड़ियों ने इन कुत्तों के भय से ही यहां आना छोड़ दिया है।      
     
अधिकारियों को लिखेंगे पत्र: सरपंच      
गांव की सरपंच ममतेश कौर का कहना है कि पूरा गांव हर समय इन लावारिस और आदमखोर हो चुके कुत्तों के चलते दहशत में रहता है। कुत्तों ने ही जैल सिंह को नोंच लिया और उसकी मौत हो गई है। यहां किसी भी समय ये कुत्ते घटना को अंजाम दे सकते हैं। यह पूरे गांव के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। इससे निजात दिलाने के लिए अधिकारियों को ग्राम पंचायत की ओर से पत्र लिखकर गुहार लगाई जाएगी।      
   
बीडीओ को दिए जांच के आदेश : एडीसी      
इस संबंध में एडीसी धर्मवीर सिंह ने बताया कि लावारिस कुत्तों का आतंक इस कदर बन चुका है, यह उनके संज्ञान में नहीं था। आज इसका पता चलने पर संबंधित क्षेत्र के बीडीओ से इसकी जांच करवाई जाएगी और लोगों को इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए जल्द ही कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।      
     
धर्मनगरी भी लावारिस कुत्तों के चंगुल में      
धर्मनगरी भी लावारिस कुत्तों के चंगुल में आई हुई है। जहां हर कॉलोनी से लेकर सेक्टर के क्षेत्र में भी इन लावारिस कुत्तों की भरमार बनी हुई है। अनेक लोग इनका शिकार हो चुके हैं। यहां तक कि गीता कॉलोनी, सपड़ा कॉलोनी सहित कई अन्य क्षेत्रों के लोग नगर परिषद प्रशासन को भी गुहार लगा चुके हैं। वहीं इस गंभीर होती जा रही समस्या को अमर उजाला ने भी यह मामला पिछले सप्ताह प्रमुखता से उठाया था। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान मनोज कौशिक का कहना है कि सपड़ा कॉलोनी के लोग लावारिस कुत्तों के चलते दहशत में है। यहां ये कुत्ते कई बार लोगों को अपना निशाना बना चुके हैं तो वहीं इनसे कई सड़क हादसे भी हो चुके हैं। हालात यह है कि यहां सांय के समय साइकिल व बाइक लेकर भी निकलना मुश्किल हो चुका है।  

पिहोवा में छह वर्षीय मासूम बच्ची को मार डाला था कुत्तों ने
पिहोवा। गांव धुलगढ़ में लावारिस कुत्तों ने पिछले वर्ष 26 सितंबर को छह वर्षीय एक मासूम बच्ची को नोंच नोंच कर मार डाला था। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया था। बच्ची के पिता मक्खन दास के अनुसार उस समय सुबह को उसकी 6 साल की बेटी अनु अपनी दादी प्रकाशों देवी के साथ खेत में गई थी। थोड़ी दूर चलने के बाद अनु थक और वही रुकने की जिद करने लगी। तब उसकी दादी ने उसे खाने के लिए अमरूद तोड़ कर दे दिया और उसे वही छोड़कर आगे खेत में चली गई। जब वह वापस आई तो कुछ लावारिस कुत्ते अनु को नोंच रहे थे। ये सब देखकर वह सहम गई और बड़ी मुश्किल से अनु को छुड़वाया। घायल अनु को स्कूल बस की सहायता से अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था।

हर रोज 8 से 10 मामले, प्रशासन का नहीं ध्यान
पिहोवा। शहर में लावारिस कुत्तों का दहशत आए दिन बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। इस बारे में नपा प्रधान अशोक सिंगला ने बताया कि लावारिस कुत्तों की समस्या उनके संज्ञान में नहीं है। अब इसके लिए नपा की अगली बैठक में यह मुद्दा उठाया जाएगा और इस पर कार्रवाई के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। वहीं सरकारी अस्पताल के कार्यकारी एसएमओ अजीत पाल ने बताया कि हर रोज कुत्तों के काटने के 8-10 मामले अस्पताल में आते ही रहते हैं। इसके लिए अस्पताल के पास एंटी रैबिज के इंजेक्शन उपलब्ध हैं।
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