कुरुक्षेत्र। कार्यक्रम में हिस्सा लेते प्रतिभागी। स्वयं
कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र के सीनेट हॉल में '' विश्वासों की जीवविज्ञान : कैसे विश्वास हमारी जैविक संरचना को आकार देते हैं '' विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वास, मानसिक प्रक्रियाओं और मानव शरीर की जैविक कार्यप्रणाली के बीच वैज्ञानिक संबंध को सरल भाषा में समझाना रहा।
मुख्य वक्ता एक सॉफ्टवेयर अभियंता, ओरेकल संस्था से जुड़े हुए और एनआईटी कुरुक्षेत्र के विशिष्ट पूर्व छात्र अमित वर्मा रहे। उन्होंने बताया कि हमारे विचार, विश्वास, परिवेश और जीवनशैली डीएनए की मूल संरचना बदले बिना ही शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने चेतन और अवचेतन मन की भूमिका को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया और बताया कि गहरे विश्वास किस प्रकार व्यवहार, भावनात्मक प्रतिक्रियाओं, आदतों और तनाव के स्वरूप को दिशा देते हैं।
व्याख्यान को संवादात्मक बनाने के लिए दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरण प्रस्तुत किए गए जिससे विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, निर्णय लेने की क्षमता और आत्म-बोध पर विश्वास प्रणाली के प्रभाव को समझने में सहायता मिली। सत्र ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच और आत्म-जागरूकता के महत्व पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर थॉट लैब समन्वयक राजेश अग्रवाल, अंशु पराशर, थान सिंह, रेनू मुंजाल, परामर्शदाता अंजलि तनेजा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।