कुरुक्षेत्र। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के मार्गदर्शन में गीता प्रवाह संगोष्ठी रविवार को आयोजित की गई। गीता अध्ययन एवं शोध केंद्र की ओर से कराई मासिक संगोष्ठी में स्वामी ज्ञानानंद ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विचार रखे।
जीओ गीता संस्थान की ओर से गीता प्रवाह की मुहिम के तहत बताया कि गीता के बिना जीवन अधूरा है। संगोष्ठी में प्रबुद्धजनों की ओर से सकारात्मक सोच के साथ गीता के प्रचार-प्रसार की जो योजना तैयार की जा रही है, उनकी सराहना की।
संगोष्ठी में इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर के कुलपति प्रो असीम मिगलानी बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। अध्यक्षता जीओ गीता सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने की। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से वाणिज्य विभाग के प्रो तेजिंद्र शर्मा मुख्य वक्ता रहे। प्रो मिगलानी ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 में स्कूली स्तर पर गीता को पाठ्यक्रम की शामिल करने की पहल की गई है, जिससे हर युवा गीता के कर्म संदेश को सहजता के साथ जान सकेगा। विकसित भारत मिशन को गति देने के लिए युवाओं को गीता से जोड़ना अति आवश्यक है।
जीओ गीता सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य गीता की मार्मिकता पर चर्चा है। प्रबुद्धजनों की ओर से गीता की प्रासंगिकता पर चर्चा की जाती है। उसके प्रचार-प्रसार पर योजना को क्रियान्वित करने की रूपरेखा तैयार होती है। मुख्य वक्ता प्रो जितेंद्र शर्मा ने कहा कि जब गीता दैनिक जीवन में शामिल होगी, तभी गीता का संदेश और उसकी सार्थकता को समझा जा सकेगा। गीता के हर श्लोक और अध्याय में हर समस्या के समाधान का गूढ़ रहस्य और जीवन जीने की कला का वर्णन है। गीता का संदेश तभी सार्थक होगा, जब गीता विचारों की क्रांति बनेगी। इस अवसर पर विवेक कोहली, आरके देशवाल, तरुण शास्त्री, रणबीर सिंह, भगत सिंह, प्रो शुचिस्मिता और डॉ. ऋषिपाल सहित अन्य बुद्धिजीवी मौजूद रहे। संवाद