संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग और भारतीय आर्थिक संघ (आईईए) के सहयोग में 107वें वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन सतत, विकसित और आत्मनिर्भर भारत विषय पर मंथन किया गया। इसमें देश के जाने-माने अर्थशास्त्री, विद्वान और नीति निर्माता शामिल हुए, जिन्होंने भारत में आत्मनिर्भर और सतत आर्थिक विकास की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।
सम्मेलन भारत की विकास यात्रा के प्रमुख पहलुओं पर केंद्रित रहा, जो आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास लक्ष्यों की दृष्टि के अनुरूप है। संयुक्त राष्ट्र एस्काप (एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए आर्थिक और सामाजिक आयोग) दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया के उप प्रमुख और वरिष्ठ आर्थिक मामलों के अधिकारी डॉ. राजन सुदेश रत्ना की अध्यक्षता में आयोजित नीतिगत परिचर्चा में आत्मनिर्भर भारत सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उत्प्रेरक विषय पर वैश्विक और राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
प्रो. कौस्तुव दलाल, डॉ. सुनील कुमार, प्रो. शाहिद अहमद आदि ने भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के साथ इसके संरेखण की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। सत्र में स्वास्थ्य अर्थशास्त्र, वित्तीय नीतियों और सतत विकास के लिए नवीन समाधानों पर चर्चा की गई। तकनीकी सत्रों में सतत कृषि, भारतीय उद्योगों के समक्ष समकालीन चुनौतियां और भारत का जनसांख्यिकी विकास जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रो. टीएन साहू, डॉ. श्याम सुंदर सिंह चौहान और प्रो. बीपी वीरभद्रप्पा जैसे विद्वानों ने इन सत्रों की अध्यक्षता की जिसमें कृषि परिवर्तन, औद्योगिक गतिशीलता और देश की जनसांख्यिकी क्षमता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
डॉ. राजकमल रॉय, डॉ. अन्नपूर्णा दीक्षित सहित अन्य विशेषज्ञों के योगदान से जीवंत चर्चा में उल्लेखनीय अंतर्दृष्टि सामने आई। राजकोषीय और मौद्रिक नीति चुनौतियों पर समानांतर चर्चाओं में डॉ. एसएस सोमरा और प्रो. दिनेश कुमार जैसे विशेषज्ञों की अध्यक्षता में भारत के सामने मौजूदा आर्थिक बाधाओं पर मंथन किया गया। सत्र का केंद्र बिंदु राजकोषीय जिम्मेदारी और मौद्रिक स्थिरता की दोहरी चुनौतियों में प्रो. जेके पराशर और डॉ. एम दिलीप आनंद सहित कई शिक्षाविदों और नीति सलाहकारों ने चर्चा की।
प्रो. मनोज सिवाच की अध्यक्षता में एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें पर्यावरणीय स्थिरता और रोजगार सृजन के समकालीन मुद्दों को संबोधित किया गया। चर्चाओं में सतत विकास प्राप्त करने और भारत की दबाव वाली आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नवीन दृष्टिकोणों पर जोर दिया गया। इस मौके पर संयोजक प्रो. अशोक चौहान, विभागाध्यक्ष प्रो. दारा सिंह, प्रो. संजीव बंसल, प्रो. प्रदीप चौहान, डॉ. कुशविंद्र कौर, डॉ. निधि बगरिया, डॉ. प्रिया, डॉ. इशू गर्ग सहित अर्थशास्त्री, शिक्षक, शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद रहे।