शहर को स्वच्छ बनाने के लिए डीसी ने 16 दिन पहले अधिकारियों को आदेश जारी किए थे, जिन पर अधिकारियों ने गंभीरता से काम न करते हुए शहर में सफाई अभियान के नाम की खानापूर्ति की। अधिकारियों ने डीसी की वाहवाही लूटने के लिए दिन तो दिन बल्कि रात में भी सफाई करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटियां लगा दी और सफाई हो जाने के बड़े बड़े दावे भी कर डाले। ग्राउंड लेवल पर देखा गया तो शहर की सूरत आज भी पहले जैसी ही है, जिसमें जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। कुछ स्थान तो ऐसे भी जहां गंदगी के सामने होते हुए भी सफाई नहीं की गई। अधिकारियों के सफाई अभियानों के बाद यदि शहर के ये हालात हैं तो अभियान से पहले दुर्दशा कैसी होगी इसका अंदाजा खुद लगाया जा सकता है। अमर उजाला टीम ने रविवार को शहर में सफाई व्यवस्था की पड़ताल की तो पिपली गीता द्वार से पिपली थर्ड और सेक्टरों सहित अन्य बहुत सही जगह स्थिति पहले से भी ज्यादा खराब नजर आई। हालांकि अधिकारियों के अनुसार इन सभी स्थानों पर अभियान चलाकर सफाई की जा चुकी है, लेकिन मौके पर पड़ी गंदगी आज भी उनके अभियान की पोल खोल रही है।
पिपली से कुरुक्षेत्र में प्रवेश करते ही 24 घंटे सात दिन लगा गंदगी का ढेर एक इंच भी कम नहीं हुआ। कोर्ट की तरफ जाने वाली सेक्टर सात की सड़क पर अभी भी 50-50 मीटर की दूरी पर गंदगी बिखरी हुई है। लघु सचिवालय परिसर भी गंदगी के अछूता नहीं है। यहां रखे डस्टीन के बाहर कूड़ा हमेशा की तरह बिखरा मिला। हालांकि सबसे पहले सफाई अभियान की शुरुआत यहीं से की गई थी। सेक्टर-13 में हनुमान मंदिर के पीछे तो जैसे डंपिंग जोन घोषित किया हुआ है, कभी भी जाकर देख लो गंदगी का अंबार मिलेगा ही मिलेगा। अभियान के नाम पर सफाई करने यहां पर कोई कर्मचारी नहीं आया। वहीं अग्रसेन चौक के समीप स्कूल के मोड पर कूड़े का ढेर लगा मिला। कुटिया वाली सड़क पर, रेलवे फाटक, पुरानी सब्जी मंडी के पीछे, झांसा रोड पर भद्रकाली मंदिर के पास, जिंदल पार्क के पास, गुरुद्वारा छठी पातशाही के समीप, अमीर रोड सहित कई सेक्टरों व कॉलोनियों में गंदगी की भरमार मिली। आसपास के लोगों से पूछा गया तो उनका था कि ऐसे अभियान का क्या फायदा जो सिर्फ कागजों में ही नजर आता है।
साफ सफाई के मामले में शहर का हार्ट कहे जाने वाले सेक्टर-17 की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यह सेक्टर एचएसवीपी के अंडर आता है और यहां करीब दो साल से यहां सफाई की टेंडर ही नहीं लगा है, जिससे व्यवस्था चरमराई हुई है। सेक्टर से कूड़े को उठाने की बजाए यहीं पर आग के हवाले कर नष्ट कर दिया जाता है। टेंडर न लग पाने का मामले दो बार कष्ट निवारण समिति की बैठक में जा चुका है, जिसमें हर बार 10-15 दिन के भीतर टेंडर लगा देने की बात कहकर मामले को टाल दिया जाता है। शुक्रवार को भी बैठक में एचएसवीपी के अधिकारी ने वही राग दोहराते हुए पल्ला झाड़ लिया।
डीसी के आदेश पर जिला नगर आयुक्त ने 60 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर शहर में सफाई अभियान चलवाया और शहर को साफ सुथरा कर देने का दावा किया। इतना ही नहीं एक जुलाई को आदेश जारी कर रात्रि में भी सफाई करने के लिए 42 कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी। इतना सब करने के बाद भी अधिकारी शहर को स्वच्छ न बना सके। लिहाजा शहर का कोई कोना ऐसा नहीं जहां गंदगी न पसरी हो।