Difficult situation, pleading with the government, faith in God
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। यूक्रेन में फंसे अपने बच्चों की सही सलामत वतन वापसी को लेकर परिजन चिंतित हैं। लगातार बढ़ती मुश्किलों के बीच वो न सिर्फ सरकार से वहां फंसे अपनों को सुरक्षित लाने की गुहार लगा रहे हैं, बल्कि पूजा-पाठ कर भगवान में भी आस्था जता रहे हैं। उधर, यूक्रेन में भारतीय अपने स्तर पर हंगरी, रोमानिया और पोलैंड के बॉर्डर तक पहुंचने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि राजधानी कीव की तरह खारकीव में भी हालात बदतर होते जा रहे हैं। यहां से निकलना बेहद मुश्किल हो रहा है। फिर भी वे किसी तरह हंगरी और पोलैंड बॉर्डर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
ज्योति नगर के रहने वाले यशपाल बंसल ने बताया कि सोमवार को वह संजीव जुल्का और सुनील धवन के साथ गृहमंत्री अनिल विज से मिलने पहुंचे थे। अनिल विज से मिलने के लिए उनको पौने 12 बजे का समय मिला था, मगर गृह मंत्री विज अचानक कहीं चले गए। खारकीव में उनका बेटा रमन, संजीव जुल्का का भतीजा आयुष और सुनील धवन की बेटी रिदनिया फंसे हुए हैं। तीनों बच्चों की टिकट बुक है, मगर वहां से कोई उड़ान नहीं है। सभी बच्चे सही सलामत हैं, मगर वहां हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। यशपाल बंसल ने बताया कि तीनों बच्चे अपने ग्रुप के साथ अपने-अपने हॉस्टल में रुके हुए हैं। रात के समय वे हॉस्टल के बंकर में ठहरते हैं। वे लगातार अपने बच्चों से संपर्क कर रहे हैं। रमन ने बताया था कि दोपहर के समय उनके हॉस्टल से तीन-चार किलोमीटर दूर बमबारी हुई है। फिलहाल उन्होंने रमन को हॉस्टल में ही रुकने की सलाह दी है।
बस से हंगरी पहुंचने की बना रहे योजना
कमोदा के मोहित शर्मा ने बताया कि डेनी परो शहर में फिलहाल शांति बनी हुई है। अभी उसके ग्रुप का कोई भी सदस्य वतन नहीं लौटा है। उसके ग्रुप के साथी अपने स्तर पर सड़क के रास्ते हंगरी पहुंचने की योजना बना रहे हैं। डेनी परो से हंगरी करीब 1200 किलोमीटर दूर है। हंगरी पहुंचने के लिए उनकी एक एजेंट से बातचीत चल रही है। एजेंट ने उनको बस के जरिए हंगरी पहुंचाने का आश्वासन दिया है। इसके लिए भारतीय दूतावास ने भी उनको मदद का आश्वासन दिया है, हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं किया हुआ है।