संवाद न्यूज एजेंसी कुरुक्षेत्र/ शाहाबाद। मीरी पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च शाहाबाद मारकंडा के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एचएसजीएमसी) के बीच व्यवस्थापकीय अधिकारों के लिए मतभेद उभरकर सामने आए हैं। दोनों पक्षों ने इस संस्थान पर प्रबंधन अधिकार पर अपने-अपने पक्ष स्पष्ट किए हैं।
हाल ही में एचएसजीपीसी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने इस संस्थान का दौरा कर इसे शीघ्र ही कमेटी के अधीन लाने और मेडिकल कॉलेज की स्थापना करने की घोषणा की थी। इसके जवाब में एसजीपीसी के सचिव और मीरी पीरी ट्रस्ट के हरियाणा सचिव सुखमिंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि यह ट्रस्ट एसजीपीसी के अधीन आता है और इसे वर्ष 2009 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा स्वतंत्र स्वायत्त संस्था घोषित किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2024 में उच्च न्यायालय द्वारा एचएसजीपीसी को इस संस्थान पर दावा करने से रोकते हुए स्थगन आदेश जारी किया गया था।
सुखमिंदर सिंह ने कहा कि वर्ष 2026 तक संस्थान में मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी चल रही है, जिसके लिए निर्माण कार्य, स्टाफ की नियुक्ति और आवश्यक खरीद की प्रक्रिया जारी है। इस परियोजना पर 100 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप की मांग : इस मामले के लिए एचएसजीपीसी के जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया कि मीरी पीरी संस्थान का प्रबंधन एचएसजीपीसी को सौंपा जाए, क्योंकि यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा मस्तगढ़ साहिब की जमीन पर स्थित है।