संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद और स्थाण्वीश्वर महादेव मंदिर के महंत बंसी पुरी ने दुखभंजन महादेव मंदिर में भगवान वामन की पालकी कंधे पर उठाकर शोभायात्रा का शुभारंभ किया। इसके बाद भगवान वामन शोभायात्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकल पड़े। श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार की ओर से आयोजित दो दिवसीय वामन द्वादशी मेले के दूसरे दिन सुबह के सत्र में श्री वामन पुराण कथा का समापन, दोपहर को भंडारा, शाम के सत्र में दंगल (कुश्ती), भव्य शोभायात्रा, सन्निहित सरोवर पर भगवान वामन की पूजा-अर्चना, नौकाविहार और भव्य आरती के साथ मेला संपन्न हो गया।
शोभायात्रा में शामिल पालकी में विराजे भगवान वामन के दर्शन करके कोई तो भाव विभोर होकर झूम उठा तो किसी ने बारंबार प्रणाम किए। भगवान की पालकी को उठाने के लिए हर कोई उत्साहित दिखा। ढोल-नगाड़े, बैंड बाजा, आकर्षक झांकियां, रंगोली, भजनों की मधुर धुन, भगवान वामन के जयकारे और ड्रोन से हो रही पुष्प वर्षा ने धर्मनगरी को वामनमयी बना दिया। सिर पर कलश लिए महिलाएं शोभायात्रा की अगुवाई कर रही थीं। पूरा शहर भगवान वामन की भक्ति रस में डूबा दिखाई दिया।
शहर में जगह-जगह पर धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं ने शोभायात्रा का स्वागत किया। कहीं पर देसी घी की जलेबी का प्रसाद वितरित किया गया तो कहीं पर मीठे पानी की सेवा की गई। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सीईओ एवं सीटीएम चंद्रकांत कटारिया रोटरी चौक पर यात्रा में शामिल हुए। शोभायात्रा के साथ विभिन्न देवी-देवताओं का स्वरूप धरे कलाकारों को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने भी पालकी को कंधा दिया।
शोभायात्रा दुखभंजन महादेव मंदिर से प्रारंभ होकर गीता स्कूल मार्केट से होते हुए आर्य समाज मार्केट, सेक्टर-17, आंबेडकर चौक, पुराना बस अड्डा, रोटरी चौक, छोटा बाजार, सीकरी चौक, नया बाजार, कच्चा घेर, कृष्णा गेट, पालिका बाजार, आहलुवालिया चौक से होकर आंबेडकर चौक और गुरुद्वारा छठी पातशाही पहुंचीं। इसके बाद सायं को सन्निहित सरोवर पर शोभायात्रा संपन्न हुई।
भारतीय नौजवान सभा अध्यक्ष अशोक शर्मा पहलवान, अश्वनी शांडिल्य ने रोटरी चौक पर शोभायात्रा का स्वागत किया। शिवरात्रि सेवा मंडल, जीओ गीता, श्री कृष्ण कृपा परिवार, बर्फानी सेवा मंडल, खाटू श्याम परिवार, शिव शक्ति सेवा मंडल, रोटरी क्लब, लायंस क्लब, फिनिक्स क्लब, मुल्तान सभा, स्थाणु सेवा मंडल, हरियाणा ब्राह्मण धर्मशाला एवं छात्रावास, इस्कॉन, श्री शिरड़ी साईं मंदिर की ओर से फूलों की वर्षा की गई।
शंकर-पार्वती के नृत्य को देखते रह गए श्रद्धालु
शोभायात्रा में शामिल 10 से ज्यादा झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। दिल्ली से आए कलाकारों ने यात्रा के स्वागत के लिए 20 अलग-अलग तरह की रंगोलियां बनाई। अंबाला से आए कलाकारों ने हनुमान की झांकी, यमुनानगर से आए कलाकारों ने श्रीकृष्ण लीला की झांकी दिखाई। शोभायात्रा में शिव पार्वती बने कलाकारों और कच्ची घोड़ी नृत्य पर श्रद्धालुओं को भी झूमने पर विशेष कर दिया।
ड्रोन से की गई 50 किलो फूलों की वर्षा
शोभायात्रा पर ड्रोन से पुष्प वर्षा की गई। हर कोई इस नजारे को अपने मोबाइल में कैद करता दिखा। ड्रोन से शोभायात्रा पर 50 किलो फूल बरसाए गए। वहीं शोभायात्रा में श्रद्धालुओं को मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद के पांच हजार पैकेट बनाए गए थे।
भगवान वामन के नौका विहार के साथ मेला संपन्न
कुरुक्षेत्र। भगवान वामन का नौका विहार और सन्निहित सरोवर तीर्थ पर देर शाम विशेष आरती के साथ वामन द्वादशी मेला संपन्न हो गया। यह कार्यक्रम गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के सानिध्य में हुआ।
नौका विहार और विशेष आरती में महंत रोशन पुरी, महंत रंगनाथ पुरी, केडीबी के सीईओ चंद्रकांत कटारिया, केडीबी सदस्य सुशील राणा, केडीबी सदस्य विजय नरुला विशेष रूप से उपस्थित रहे। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद व कटारिया ने तीर्थ की आरती उतारी और पूजन किया। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि सांस्कृतिक मेले हमारी परंपरा का अंग है। भाद्रपद बड़ा ही श्रेष्ठ मास है। इसमें जहां भगवान श्री कृष्ण का अवतार हुआ, वहीं भगवान ने वामन के रूप में अवतार लेकर राजा बलि का अहंकार तोड़ा। इस अवसर पर दीपक चोपड़ा, सुरजीत सलूजा, प्रदीप झांब, धीरज गुलाटी, गुलशन ग्रोवर, प्रेम मदान, अजय गुप्ता आदि मौजूद रहे। संवाद
सन्निहित तीर्थ का पूजन करते स्वामी ज्ञानानंद। संवाद- फोटो : Kurukshetra
शोभा यात्रा के दौरान सिर पर कलश धारण कर चलती महिलाएं। संवाद- फोटो : Kurukshetra
भगवान वामन की शोभायात्रा पर पुष्प वर्षा करता ड्रोन। संवाद- फोटो : Kurukshetra
शोभायात्रा में शिव नृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra
राधा-कृष्ण की प्रस्तुति देते कलाकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra
भगवान वामन की पालकी को उठाते स्वामी ज्ञानानंद साथ में महंत बंसी पुरी। संवाद- फोटो : Kurukshetra