कुरुक्षेत्र। एक नवंबर 1966 को हरियाणा प्रदेश की स्थापना हुई तो छह साल दो माह 23 दिन बाद 23 जनवरी 1973 को प्रदेश की धार्मिक राजधानी माना जाने वाला कुरुक्षेत्र जिला अस्तित्व में आया। इससे पहले यह करनाल जिले का एक हिस्सा था। अपने 49 साल के अब तक के सफर में कुरुक्षेत्र ने धर्म में ही नहीं बल्कि शिक्षा व स्वास्थ्य से लेकर हर क्षेत्र में नए आयाम छुए हैं। आज कुरुक्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम हैं।
हालांकि यह पहचान गीता ज्ञान स्थली व महाभारत युद्ध के तौर पर थी, लेकिन विकास की दृष्टि से आज कुरुक्षेत्र का नाम विश्व के मानचित्र पर चमक रहा है। कुरुक्षेत्र के विकास का दौर पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा के समय से ही शुरू माना जाता है। उनके द्वारा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन किया गया था, जिसके बाद कुरुक्षेत्र को अलग पहचान मिली और ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर तीर्थ व अन्य धार्मिक स्थऊलों का जीर्णोद्धार हुआ।
वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी वर्ष 2021 के बजट में इसे दिव्य कुरुक्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी, जिसके बाद कुरुक्षेत्र को सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाने लगा। कुरुक्षेत्र जिला बनने से पहले एक अगस्त 1968 को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन हुआ था तो वर्ष 1971 में ब्रह्मसरोवर के जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ। 1975 में विशाल रुप लिया ब्रह्मसरोवर एशिया का सबसे बड़ा सरोवर कहा जाने लगा।
कुरुक्षेत्र में जहां प्रदेश अस्तित्व में आने से पहले ही विश्वविद्यालय था तो वहीं अब श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय भी कुरुक्षेत्र में ही स्थापित किया जा रहा है, जिसके साथ ही आयुर्वेद में भी कुरुक्षेत्र आयाम छूने लगा है। जहां सूर्य ग्रहण मेले में देश-विदेश से यहां लाखों लोग पहुंचते हैं तो गीता महोत्सव भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने लगा है।
केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि इस वर्ष कुरुक्षेत्र के 48 कोस में स्थित 80 तीर्थो के जीर्णोद्धार का काम चलाया गया, जिनमें क्योड़क, काकौत, बहलोलपुर, पाढ़ा, बस्तली के तीर्थों का काम पूरा कर लिया गया है। अगले साल 40 और तीर्थों के जीर्णोद्धार किए जाने का लक्ष्य है। संवाद
एक नजर में कुरुक्षेत्र
1530 स्कवेयर मीटर एरिया में स्थित कुरुक्षेत्र जिला में वर्तमान में 9 लाख 64 हजार 655 आबादी है, जिनमें 5 लाख 10 हजार 976 महिलाएं हैं। लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 909 महिलाएं हैं और साक्षरता दर 76.07 प्रतिशत है। चार डिवीजन और छह तहसील हैं। पांच कस्बे और सात ब्लॉक हैं। जिले में दो विश्वविद्यालय के साथ-साथ 18 महाविद्यालय हैं। तीन राष्ट्रीय और चार राज्य राजमार्ग हैं। 400 से ज्यादा ग्राम पंचायत और थानेसर, पिहोवा, लाडवा और शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र हैं।
भगवान श्रीकृष्ण 50 फुट ऊंचा विराट स्वरूप मिला
गीता जन्म स्थली ज्योतिसर में इस साल धर्मनगरी को श्रीकृष्ण का 50 फुट उंचा विराट स्वरूप मिला है, जिस पर 10 करोड़ की लागत आई है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इसका लोकार्पण किया था। यहीं पर करीब चार करोड़ की लागत से लाइट एंड साउंड शो स्थापित किया जा रहा है।
इन्होंने दिलाई कुरुक्षेत्र को बड़ी पहचान
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान रहे एवं प्रदेश के खेल राज्य मंत्री संदीप सिंह पर सूरमा व कई अन्य फिल्में भी बनीं। महिला हाकी टीम कप्तान रानी रामपाल, ओलंपियन नवजौत कौर, नवनीत कौर, सुरेंद्र पालड़, राजेंद्र उमरी, अर्जुन अवार्डी दलेल सिंह व सुनील कुमार ने कुरुक्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिया।
ये परियोजनाएं पूरी होने की उम्मीद
पिपली में अंतरराज्यीय बस अड्डा, ऐलिवेटेड रेलवे ट्रैक, 100 बेड का सिविल अस्पताल का दूसरा भाग, पिहोवा में 50 बेड का अस्पताल, पिपली से थर्ड गेट सिक्स लेन प्रोजेक्ट।
ये हुए बदलाव
पहला सिनेमा रुद्रा गौतम के नाम रुद्रा थिएटर बना। 1966 में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन। 1968 में करनाल से अलग जिला कुरुक्षेत्र बना 1973 में। श्रीकृष्ण राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज। विख्यात ब्रह्मसरोवर का जीर्णोद्धार 1975, पिपली चिड़ियाघर 1982, श्रीकृष्ण संग्रहालय 1991,राष्ट्रीय स्तर पर गीता जयंती की शुरुआत1989, पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र 2001, गीता जयंती को राष्ट्रीय उत्सव की पहचान 2001, रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज 2002, डीम्ड यूनिवर्सिटी, फिर एनआईटी बनी,18 मंजिला गीता ज्ञान मंदिर-2004, कल्पना चावला तारामंडल, 2005, हरियाणा धरोहर संग्रहालय, 2006, 1857 की क्रांति में हरियाणा का योगदान संग्रहालय, 2008, होटल मैनेजमेंट संस्थान, 2008, हरियाणा मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर, 2009, तिरुपति बालाजी मंदिर 2012, गीता जयंती को अंतरराष्ट्रीय उत्सव की पहचान 2016, केंद्र की 100 करोड़ की कृष्ण सर्किट परियोजना 2016, गीता ज्ञान मंदिर, 2016, महाभारत थीम पर रेलवे जंक्शन का कायाकल्प 2016, आयुष विश्वविद्यालय 2019, गीता ज्ञान संस्थानम।