कुरुक्षेत्र। समय के साथ कदमताल करते हुए धर्मनगरी लगातार नए आयाम छू रही है। पिछले पांच वर्षों के दौरान ही करोड़ों के विकास कार्यों के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पविहन से लेकर पर्यटन तक हर क्षेत्र में कदम बढ़े हैं। पूरी होती अनेक परियोजनाओं से न केवल धर्मनगरी का स्वरूप बदला है बल्कि देश-दुनिया में नई पहचान भी मिली है। यह बदलते कुरुक्षेत्र का ही असर है कि आज दुनियाभर के लोग इसे देखने के लिए लालायित है। गीता की स्थली के तौर पर ही नहीं अब पर्यटन के रूप में भी धर्मनगरी की अपनी पहचान बनी है।
दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे 44 के साथ-साथ नेशनल हाईवे 152 डी से भी सटी धर्मनगरी में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान ही लाखों लोग पहुंचते हैं तो वहीं यह महोत्सव विदेशों में भी अपनी छाप छोड़ चुका है। विभिन्न देश अपने यहां इस महोत्सव को मनाने के लिए आगे आ चुके हैं। यहां हर रोज करीब 10 हजार पर्यटक व श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंच रहे हैं।
तीन माह तक 225 करोड़ की ऐलिवेटेड रेल ट्रक परियोजना पूरी
धर्मनगरी में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ड्रीम प्रोजेक्ट ऐलिवेटेड रेल ट्रैक का निर्माण अगले तीन माह तक पूरा होने की उम्मीद है। करीब 225 करोड़ का यह प्रोजेक्ट केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से संयुक्त रूप से तैयार किया जा रहा है, जिसके पूरा होने से शहर को मानवयुक्त पांच रेलवे फाटकों से निजात मिलेगी। यह शहर के लोगों की सबसे बड़ी मांग पूरी होगी। रेलवे ट्रैक के चलते शहर दो हिस्सो में बंटा हुआ था। परियोजना को पूरा कराने के लिए राज्यमंत्री सुभाष सुधा खुद निगरानी में लगे हैं।
260 करोड़ से तैयार किया जा रहा ज्योतिसर अनुभव केंद्र
गीता जन्म स्थली ज्योतिसर को खासतौर से धर्म के साथ-साथ पर्यटन के तौर पर भी विकसित किया जा रहा है। करीब 260 करोड़ का खास प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसके तहत महाभारत थीम पर ज्योतिसर अनुभव केंद्र बनाया जा रहा है।
प्रोजेक्ट की गैलरी एक और दो बनकर तैयार हो चुकी है। फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनका लोकार्पण भी कर चुके हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत एक्जिबिशन ऑर्प आर्टिस्टिक, थीमेटिक, मल्टीमीडिया, नरेटिव जो कि महाभारत थीम पर आधारित होगी, ये निर्माणाधीन है।
अध्यात्म की भी धर्मनगरी में बह रही धारा, पूरी दुनिया में संदेश
ज्योतिसर की धरती पर ही श्रीकृष्ण ने पूरी मानवता के लिए हजारों वर्ष पहले गीता का संदेश दिया था, जो आज भी वैसे ही सार्थक है। इसी संदेश में जीवन जीने के राह निकलती है। ऐसे में धर्मनगरी की दुनिया में विशेष पहचान है। यही नहीं अब अध्यात्म के तौर पर धर्मनगरी ने और भी कदम बढ़ा दिए हैं। ज्योतिसर में ही करीब 200 करोड़ से पहला श्रीकृष्ण अर्जुन मंदिर इस्कॉन की ओर से बनाया जा रहा है तो वहीं इसी क्षेत्र में प्रदेश का पहला भीम मंदिर भी निर्माणाधीन है। यही नहीं गीता को हर कोई जान सके, इस पर शोध हो और इसका अनुसरण कर लोग जीवन को सरल बना सकें, इसके लिए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के अथक प्रयास से गीता ज्ञान संस्थानम स्थापित किया गया है।
एशिया का सबसे बड़ा सरोवर ब्रह्मसरोवर
धर्म की इसी धरा पर ही पवित्र ब्रह्मसरोवर है, जो एशिया का सबसे बड़ा व व्यवस्थित सरोवर माना जाता है। स्व. गुलजारी लाल नंदा के अथक प्रयास से विकसित रूप में आए ब्रह्मसरोवर को देश के आईकोनिक साइट में शामिल किया जा चुका है। यहीं पर ही हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जाता है तो सूर्य ग्रहण मेले का भी यहीं आयोजन होता है। इसके साथ ही सन्निहित सरोवर भी स्थित है, जिसकी अपनी मान्यता व महत्ता है।
जिले की प्रमुख विकास परियोजनाएं, जिनमें कई हो चुकी पूरी
- 152 डी एक्सप्रेसवे लागत-5108 करोड़
- एलिवेटेड ट्रैक-225 करोड़
- 100 बेड का नागरिक अस्पताल भवन-39 करोड़
- 100 बेड नागरिक अस्पताल प्रस्तावित भवन 88 करोड़
- शाहाबाद अस्पताल 30 से 100 बेड अपग्रेड-36 करोड़
- एलएनजेपी नागरिक अस्पताल व शाहाबाद में ऑक्सीजन प्लांट स्थापना 2.50 करोड़
- कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन भवन 11.15 करोड़
- अंडर रेलवे ट्रैक पास-17 रेलवे ट्रैक अंडरपास-85 करोड़
- शाहाबाद रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म निर्माण 1.25 करोड़
- मोहड़ी रेलवे स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज -1 करोड़
- कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन को अमृत मॉडल स्टेशन विकसित करना-100 करोड़
पिपली बना खंड, इस्माईलाबाद को मिल चुकी नगर पालिका
पिछले पांच साल के दौरान ही जिले का पिपली नया खंड बन गया है, जिसका मुख्यालय गांव बिहोली में बनाया गया है। यही नहीं पिपली गांव को नगर परिषद थानेसर का हिस्सा भी करीब एक वर्ष पहले ही बनाया गया है। वहीं इस्माईलाबाद को ग्राम पंचायत की बजाय नगर पालिका बनाई गई, जहां विदेशी मूल की महिला आम आदमी पार्टी की ओर से पहली चेयरपर्सन बनी थी।
सरस्वती नदी को मिला नया स्वरूप
अगाध आस्था का प्रतीक रही सरस्वती नदी को पिछले पांच वर्षों के दौरान ही नया स्वरूप मिला है। इसके जीर्णोद्धार से लेकर संरक्षण के प्रति भी कदम बढ़े हैं। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड में जहां मुख्यमंत्री अध्यक्ष है तो धुम्मन सिंह किरमच उपाध्यक्ष है, जिनके नेतृत्व में करोड़ों रुपये से सरस्वती का जीर्णोद्धार हो सका है। न केवल इसमें पानी बहने लगा है बल्कि भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने में मुख्य तौर पर सहायक साबित होने लगी है। इसके साथ लगते हर गांव में घाट बनाए जा रहे हैं, ताकि लोग पूजा अर्चना व स्नान कर सकें। बोर्ड ने सरस्वती की 23 धाराएं भी चिह्नित की है।
केडीबी परवान चढ़ा रही योजनाएं : सिंघल
केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल का कहना है कि स्व. गुलजारी लाल नंदा ने 1968 में केडीबी की स्थापना की थी और आज भी यह बोर्ड अनेक परियोजनाओं को परवान चढ़ाने में लगा है। समय-समय पर तीर्थाटन व धर्म की दृष्टि से अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। गीता महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। इंग्लैंड से लेकर कनाडा तक इस उत्सव की धूम मच चुकी है। कुरुक्षेत्र में भी हर साल उत्सव में करीब 40 लाख पर्यटक पहुंचते हैं।