कुरुक्षेत्र। गीता जयंती के समापन पर ब्रह्मसरोवर पर एयर बैलून छोड़ते श्रद्धालु। संवाद
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के मुख्य कार्यक्रमों के अंतिम दिन धर्मनगरी गीता के रस में डूबी रही। कहीं गीता पाठ, श्रीमद्भगवद् कथा, 48 कोस तीर्थ सम्मेलन, दीपदान तो कहीं अन्य गतिविधियों का आयोजन किया गया। वहीं ब्रह्मसरोवर तट के घाटों पर दिनभर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। देश-विदेश से आए कलाकारों ने अपने लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों से पर्यटकों का मन मोह लिया। पर्यटकों ने पूरे उत्साह के साथ आयोजन का आनंद लिया तथा सरस और शिल्प मेले में जमकर खरीदारी की।
महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें कई प्रदेशों के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। लोक नृत्य, गीत, और नाट्य प्रस्तुतियों ने पर्यटकों का दिल जीत लिया। विदेशी कलाकारों ने भी अपने सांस्कृतिक प्रदर्शन से भारतीय संस्कृति के साथ मेलजोल की भावना को प्रकट किया। हरियाणा पवेलियन में सहभागी प्रदेश ओडिशा, सहभागी देश तंजानिया और हरियाणवी संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसकी हर कोई सराहना करता दिखाई दिया। मुख्य कार्यक्रमों के अंतिम दिन मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी दर्जनों कार्यक्रमों में भाग लिया और अपनी उपस्थिति से आयोजन को गौरवपूर्ण बनाया।
उन्होंने गीता के संदेश को समाज में फैलाने और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक रूप देने की अपील की तथा तीर्थ स्थलों और अपने आसपास सफाई रखने का आह्वान किया। सहभागी देश तंजानिया और विभिन्न प्रदेश के कई कलाकार देर रात ही रवाना हुए।
महोत्सव के चलते पूरे शहर में मेले जैसा माहौल रहा। वहीं पिहोवा और लाडवा में भी जिला स्तरीय गीता जयंती समारोह मनाया गया। इन आयोजनों में भी स्थानीय और बाहरी कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।