कुरुक्षेत्र। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर हजारों वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश दिए। इस धर्मनगरी से पूरे विश्व को कर्म करने का संदेश मिल रहा है। इस कर्मभूमि की धरा पर 11 दिसंबर को होने वाले दीपोत्सव में दीपकों की रोशनी पूरी दुनिया तक पहुंचेंगी और पवित्र ग्रंथ गीता के ज्ञान का प्रकाश फैलाने का काम करेंगी। वे सोमवार को देर सायं ब्रह्मसरोवर पुरुषोतमपुरा बाग में महाआरती कार्यक्रम के दौरान बातचीत कर रहे थे। इससे पहले गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने पुरुषोतमपुरा बाग में सायं कालीन सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया।
गीता मनीषी ने कहा कि यह खुशी का अवसर है कि कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर गीता महोत्सव के माध्यम से पूरी दुनिया को शांति का संदेश दिया जा रहा है। इस गीता स्थली पर हिंदोस्तान के संतों ने अपनी ओजस्वी वाणी से पूरी दुनिया को गीता के उपदेशों पर चलने के लिए प्रेरित किया है। इस भूमि की तरफ पूरा विश्व आकर्षित हो रहा है। इस सांध्यकालीन महाआरती को देखने पर सुखद अहसास होता है। इस मौके पर बाबा भूपेंद्र सिंह, अयोध्या श्रीराम मन्दिर के चंपत राय, केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा, केडीबी के सदस्य ऋषिपाल मथाना, एमके मोदगिल, कैप्टन परमजीत सिंह, युद्धिष्ठर बहल, अशोक रोशा, प्राधिकरण के सदस्य सौरभ चौधरी मौजूद रहे।