कुरुक्षेत्र। मुगलकाल व अंग्रेजी शासन के साथ-साथ विभिन्न देशों के सिक्के देखने की लालसा है तो इसे शाहाबाद के धर्मवीर हंस पूरी कर सकते हैं। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में लगाई गई तीन दिवसीय प्रदर्शनी में भी अपने संग्रहित किए सिक्काें का प्रदर्शन किया है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान लगी प्रदर्शनी में पहुंचे धर्मवीर हंस ने बताया कि वे पुस्तक विक्रेता के तौर पर बचपन से काम कर रहे हैं। बचपन से ही सिक्कों को इकट्ठा कर रहे हैं। आज उनके पास मुगलकालीन सिक्के, अंग्रेजी शासनकाल के सिक्के जो साल 1835, 1877, 1938 से लेकर 1947 तक के चलन में रहे, उनका संग्रह है।
इसके अलावा, साल 1950 से 1965 तक के सिक्के जिनमें सुराख वाला पैसा, घोड़े वाला पैसा, चवन्नी और अठन्नी भी उनके पास सुरक्षित हैं। वहीं 1 अप्रैल 1957 से 1963 तक जारी दशमलव शृंखला के नए पैसे एक नया पैसा, दो नए पैसे, पांच नए पैसे, 25 नए पैसे, 50 नए पैसे और 100 नए पैसे भी उनके संग्रह में शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि उनके पास साल 1964 से लेकर 2025 तक की दशमलव प्रणाली के एक पैसे से लेकर 10 रुपये तक के सिक्कों की शृंखला भी मौजूद है। धर्मबीर कहते हैं कि शौक की कोई कीमत नहीं होती। उनका पहला विदेशी सिक्का श्रीलंका से आया था, जब वे पहली बार विदेश गए थे। उन्होंने बताया कि दुकान पर बैठते समय जब सिक्के आते थे तब वे सोचते थे कि लोग इसकी कीमत नहीं समझते, तब से इन्होंने उन्हें सहेजना शुरू किया और धीरे-धीरे यह एक बड़ा संग्रह बन गया। आज वे इसे प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को दिखाते हैं, ताकि युवा पीढ़ी पुराने सिक्कों को देखकर इतिहास को समझ सके।
32 देशों के विदेशी सिक्कों का संग्रह
धर्मबीर हंस ने बताया कि उनके पास देश ही नहीं बल्कि विदेशों के सिक्कों का भी संग्रह है। उनके पास कनाडा, नेपाल, अमेरिका, थाईलैंड, पाकिस्तान, ईरान, जॉर्डन, इस्राइल, बेल्जियम और लेबनान सहित 32 देशों के सिक्के मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे उनके शौक के बारे में लोगों को पता चला, विदेश में रहने वाले परिचितों ने भी उनके लिए सिक्के उपलब्ध करवाए।
180 प्रकार के स्मारक सिक्के, कुल 3500 सिक्कों का संग्रह
धर्मबीर हंस ने बताया कि उनके पास केंद्र सरकार की ओर से जारी 180 प्रकार के स्मारक सिक्के भी हैं। इसके अलावा करीब 500 प्रकार के सिक्कों सहित उनके पास लगभग 3500 सिक्कों का संग्रह मौजूद हैं।