कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी आध्यात्म, धर्म और शिक्षा का केंद्र है। इस भूमि की धूल को मानव अपने माथे पर लगाकर स्वयं को धन्य मानता है। इसे भारत की प्राचीन संस्कृति का उद्गम स्थल भी कहा जाता है।
कुरुक्षेत्र विश्वभर में ऋषियों-मुनियों तथा देवताओं की तपोस्थली, कर्मभूमि और यज्ञभूमि के रूप में विख्यात है।
ये विचार राज्यपाल प्रो असीम कुमार घोष ने व्यक्त किए। वे शनिवार को अंतरराष्ट्ररीय गीता महोत्सव के सरस व शिल्प मेले के उद्घाटन उपरांत केडीबी परिसर में बनाए गए मीडिया सेंटर का भी उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने में केंद्र व राज्य सरकार के प्रयास सार्थक हुए हैं।
यह महोत्सव अब इस महोत्सव के संदेश को विदेशों तक पहुंचाने में मीडिया का अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि देश को आजाद करवाने और आजादी के बाद भी प्रैस ने राष्ट्र-निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाते हुए अपनी उपयोगिता को पूरी शक्ति के साथ प्रमाणित किया है। संवाद