कुरुक्षेत्र। हर वर्ष की भांति जग ज्योति दरबार के महंत राजेंद्र पुरी एवं अन्य संतों के सान्निध्य में शनिवार को देवउठनी एकादशी पूजन प्रारंभ हुआ। इसका समापन विशेष अनुष्ठान के साथ रविवार को होगा। दरबार में रविवार को तुलसी माता का पूजन व तुलसी-शालिग्राम विवाह होगा। महंत ने बताया कि हिंदू धर्म में तुलसी माता और शालिग्राम भगवान के विवाह का आयोजन करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान विष्णु जी और मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। कार्तिक का महीना बहुत महत्व रखता है। महंत ने बताया कि कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसे देवोत्थान या देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागकर पुनः सृष्टि के कार्यों का संचालन आरंभ करते हैं। साथ ही देवउठनी एकादशी से ही विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। वहीं इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है।