कुरुक्षेत्र। सावन माह की अमावस्या पर ब्रह्मसरोवर और पिहोवा सरस्वती तीर्थ पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। अल सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया और दिन चढ़ते-चढ़ते तीर्थ स्थल आस्था और श्रद्धा से सराबोर हो गए। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने ब्रह्मसरोवर और सरस्वती तीर्थ में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया और पितरों की शांति के लिए पिंडदान व तर्पण किया।
सावन माह की अमावस्या को धार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थान प्राप्त है। ज्योतिषाचार्य बलराज कौशिक का कहना है कि इस दिन स्नान, दान और पितृ कार्य का अत्यधिक महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन तीर्थ स्नान और पितृ तर्पण करने से पूर्वजों को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हरियाली अमावस्या होने के कारण यह दिन पर्यावरण और पौधारोपण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल, स्वास्थ्य सेवाएं और सफाई कर्मी ड्यूटी पर तैनात रहे।
ब्रह्मसरोवर क्षेत्र में साफ-सफाई, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन की ओर से सभी सुविधाएं श्रद्धालुओं को मुहैया कराई गई।