संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्रावण मास के पावन अवसर पर कुरुक्षेत्र के एकमात्र शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर में मंगलवार को 108 पार्थिव शिवलिंगों का भव्य रुद्राभिषेक श्रद्धा के साथ आयोजित हुआ। अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और भगवान शिव व मां भद्रकाली के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो उठा।
पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा के सान्निध्य में आचार्य आर्यमन कौशिक, आचार्य अमन जोशी और आचार्य राजेश वत्स के मार्गदर्शन में 27 ब्राह्मणों ने विधिविधान के साथ रुद्राभिषेक संपन्न कराया। श्रद्धालुओं ने 108 पार्थिव शिवलिंगों का पूजन कर गंगाजल, दूध, दही, शहद, पंचामृत, फल, फूल, बेलपत्र सहित विभिन्न पूजन सामग्री से अभिषेक किया।
मंदिर परिसर में लगातार जय मां भद्रकाली और हर हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। शिव और शक्ति की आराधना के इस आयोजन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई और पूरा शक्तिपीठ भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। पंडित सतपाल ने बताया कि सनातन परंपरा में भगवान शिव को जल अर्पित करना अत्यंत पवित्र माना गया है। शिवलिंग पर जल चढ़ाना केवल पूजा की विधि नहीं, बल्कि मन की शुद्धि, अहंकार के त्याग और भगवान शिव के चरणों में स्वयं को समर्पित करने का प्रतीक है।
गंगाजल और पंचामृत का बताया विशेष महत्व
पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि रुद्राभिषेक में गंगाजल का विशेष महत्व है। भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था, इसी कारण शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने की सनातन परंपरा रही है। गंगाजल से अभिषेक करते हुए श्रद्धालु जीवन में पवित्रता और आध्यात्मिक शांति की कामना करते हैं। वहीं दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से निर्मित पंचामृत भगवान शिव को अर्पित करना समृद्धि, मधुरता, पोषण और मंगलभाव का प्रतीक माना जाता है।
कुरुक्षेत्र। मां भद्रकाली मंदिर में पार्थिव शिवलिंगों की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। स्वयं- फोटो : Social Media
कुरुक्षेत्र। मां भद्रकाली मंदिर में पार्थिव शिवलिंगों की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। स्वयं- फोटो : Social Media