कुरुक्षेत्र। जग ज्योति दरबार में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वितीया पर सोमवार को नर्मदेश्वर महादेव शिवलिंग पर अभिषेक के बाद महंत राजेंद्र पुरी ने सत्संग में कहा कि मनुष्य जीवन में हर क्षण सुख नहीं रहते हैं। मनुष्य जीवन में सुख के साथ दुख भी हैं। दुख का सामना करने के बाद ही परमात्मा एवं सुख का अहसास होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन हर दिन एक नई आशा एवं निराशा लेकर आता है।
मनुष्य का जीवन एक पुस्तक समान है जिसमें हर दिन एक नया अध्याय जुड़ता है। इस बात की वास्तविकता को हमें समझना चाहिए। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि पुस्तक के कुछ पन्ने खुशियों से भरे होते हैं, कुछ आंसुओं से भीगे हुए, कुछ अधूरे और कुछ इतने खूबसूरत हैं कि उन्हें बार-बार पढ़ने का मन करता है। उन्होंने कहा कि इस बात के प्रमाण वेद पुराणों में भी विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन की पुस्तक का लेखक परमात्मा है जो हमारे कर्मों के अनुसार ही पुस्तक के अध्याय लिखते हैं। इसलिए कहा गया है कि परमात्मा के प्रति जीवन समर्पित कर सच्चे मन से कर्म करने चाहिए।
इस अवसर पर ज्योति गर्ग, मंजू रानी, सुषमा, किरण बाला, नरेश कुमार, नीलम शालू, हरबंस सिंह, परमजीत, गुरनाम कौर, अरविन्द कुमार, पूनम रानी, सुरेंद्र कुमार, कमलेश, हेमंत शर्मा, रेणु रानी, रंजीत, प्रवीण कुमार, मोहन सिंह, अक्षय राठी अजय राठी व विजय राठी इत्यादि मौजूद रहे।