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धर्मनगरी की सड़कों पर बेसहारा गोवंश का कब्जा, राहगीर परेशान

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शहर की मुख्य सड़क पर घूमते बेसहारा गोवंश और गुजरने वाहन सवार संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी को कैटल फ्री बनाए जाने के सपने पिछले कई साल से दिखाए जा रहे हैं। बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे तो अधिकारी योजनाएं भी बनाते रहे, लेकिन धरातल पर ये ये हवाई साबित हो रहे हैं। सेक्टर हो या फिर कॉलोनी, हर गली व सड़क पर बेसहारा गोवंश के झुंड इन दावों व योजनाओं की पोल खोल रहे हैं।
प्रशासन सूर्य ग्रहण मेले के चलते भी शहर की सड़कों को पशुओं से मुक्त नहीं कर पाया तो अब अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव की तैयारी की जा रही है, जिस दौरान भी पशु बड़ी समस्या बन सकते हैं। प्रशासन पहले कागजी तौर पर शहर को एक बार कैटल फ्री जरूर दिखा चुका है। वहीं सड़कों पर आज भी करीब एक हजार गोवंश हकीकत बयां कर रहे हैं।
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शहर में गली मोहल्ला ही नहीं मुख्य सड़कों पर भी बड़ी संख्या में बेसहारा गोवंश को देखा जा सकता है। सड़कों पर बीचों-बीच खड़े गोवंश से न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि लोगों की जान पर भी खतरा मंडराता रहता है। शहरवासी कई बार स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन और नगर परिषद के अधिकारियों के समक्ष शहर को पुश मुक्त करने की गुहार लगा चुके हैं।
शहर वासी प्रदीप कुमार व आनंद सिंह ने अमीन रोड पर पशुओं का झुंड दिखाते हुए कहा कि अधिकारी सड़कों से पशु तो हटा नहीं पा रहे, अन्य विकास क्या करवा पाएंगे। इन पशुओं से अनेक बार बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें राहगीरों की जान भी जा चुकी है। कई बार गोवंश की भी मौत हो चुकी है तो घायल भी हो रहे हैं।
राहगीरों ही नहीं शहर वासियों के लिए भी यह बड़ी समस्या है। प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। वहीं केडीबी रोड पर सूरजपाल का कहना था कि रात के समय इन गोवंश से ज्यादा खतरा रहता है। शहर में अधिकतर सड़कों की लाइटें बंद रहने के कारण अंधेरे में सड़क पर बैठा गोवंश नजर नहीं आता, जिस कारण वाहन इनसे टकरा जाते हैं।
नगर परिषद कर्मियों की मानें तो अधिकतर गोशाला में पर्याप्त संख्या में पशु है और सड़कों पर घूम रहे गोवंश को लेने के लिए गोशाला संचालक तैयार नहीं है। ऐसे में शहर से अधिकतर गोवंश को मथाना व बारना गोशाला में ही छोड़ा जाता रहा है। पिछले दिनों लंपी वायरस के चलते सभी गोशाला नें ही इंकार कर दिया था, जिसके बाद डीसी को निर्देश जारी करने पड़े थे।
दो महीने में दो की मौत
गोवंश की वजह से पिछले दो माह में एक बच्ची व युवक काल का ग्रास बन गए। करीब 15 दिन पहले पिहोवा-ढांड रोड पर डेरा बाजीगर के पास एक गोवंश से टकरा बाइक सवार 20 साल के अजय निवासी साकरा (कैथल) की मौत हो गई थी। वहीं 24 अगस्त को शाहाबाद की लक्की कॉलोनी में सांड़ के हमले में एक 11 साल बच्ची पलक की मृत्यु हुई थी। वहीं 19 अक्तूबर को गांव यारा में एक 53 वर्षीय महिला बीरो देवी सांड़ के हमले में जख्मी हो गई थी।
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टेंडर लगाने की तैयारी : बिश्नोई
नगर परिषद के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर रूपरविंद्र बिश्नोई का कहना है कि शहर की सड़कों को पशु मुक्त करने के लिए कई बार अभियान चलाया जा चुका है। इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में पशु सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। अब इन्हें पकड़े जाने को लेकर जल्द ही टेंडर लगाया जाएगा, जिसकी तैयारी की जा रही है।
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