मकर संक्रांति पर श्रद्धा की डुबकी लगाने पहुंचे तीर्थ यात्रियों को ब्रह्मसरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर निराश होना पड़ा। ब्रह्मसरोवर में जहां आज डुबकी लगाने के लिए रेलिंग से इधर सिर्फ एक फुट से भी कम पानी मिला, वहीं पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर पानी में कीड़े और गंदगी देेखकर श्रद्धालु मायूस होकर बिना स्नान किए ही पूजा अर्चना करने पर विवश हुए।
बता दें कि कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर और सरस्वती तीर्थ पर स्नान का विशेष महत्व है। वहीं मकर संक्रांति जैसे विशेष अवसरों पर सरस्वती तीर्थ में स्नान करने के लिए देश-प्रदेश से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। सालभर सरस्वती तीर्थ पर पिंडदान करने वाले देश-विदेश के लोग यहां पहुुंचते हैं। ऐसे सरस्वती सरोवर की बदहाली को देखते हुए श्रद्धालुओं की स्नान करने की मंशा को दिल में ही दबकर रह जाती है। सरस्वती तीर्थ का जल दूषित एवं दुर्गंध युक्त हो चुका है। सरोवर के जल में पॉलीथिन, काई और गंदगी तैर रही है और इससे श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंच रही है। देहरादून से आए चरणजीत मल्होत्रा ने बताया कि सरस्वती तीर्थ की महत्ता को देखते हुए अपने परिवार के साथ यहां स्नान, पूजा और भ्रमण करने के लिए आए थे। सबसे पहले तो सरोवर में रेलिंग तक जलस्तर बहुत कम होने के कारण यहां स्नान करना बहुत मुश्किल है और इससे आगे जाकर स्नान करना घातक सिद्ध हो सकता है। वहीं दूसरा सरोवर में पड़ी गंदगी को देख परिवार के साथ मकर संक्रांति पर स्नान करने आए थे, लेकिन सरोवर में पड़ी गंदगी को देखकर उनका स्नान करने का इरादा बदल गया है। उनकी पत्नि शिप्रा मल्होत्रा ने बताया कि मकर संक्रांति पर वो स्नान करना चाहते थे और उसके बाद ही पूजा-अर्चना करनी थी, लेकिन सरोवर के गंदे पानी के कारण बिना स्नान के ही पूजा करने को विवश हैं। इसी तरह यमुनानगर से आए विनीत घई ने बताया कि सरस्वती सरोवर का पानी बहुत खराब हो चुका है। इसमें स्नान करना बीमारियों को निमंत्रण देना है। दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पिंडदान कराने आते हैं। श्रद्धालुओं को यहां पिंडदान कराने के लिए स्नान एवं आचमन करने के लिए सरोवर के जल जरूरी होता है, लेकिन जो स्थिति इन दिनों सरस्वती सरोवर में बनी हुई है, उसे देखकर कोई भी व्यक्ति आचमन तो दूर यहां स्नान करने को भी तैयार नहीं होगा। इससे न केवल श्रद्धालुओं की आस्था पर कुठाराघात हो रहा है, बल्कि प्रदेश सरकार के दावों को भी बट्टा लग रहा है।
श्रद्धालुओं की संख्या घट रही : अरुण कौशिक
तीर्थ पुरोहित अरुण कौशिक के अनुसार प्रत्येक माह अमावस्या के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान एवं पिंडदान करने आते हैं, लेकिन सरोवर की दुर्दशा को देखकर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार घटती जा रही है और यदि प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो प्राचीन समय से अपनी महत्ता रखने वाले यह तीर्थ का इतिहास ही न बन जाए। प्रशासनिक लापरवाही के चलते सरोवर दुर्दशा का शिकार हो रहा है। बहते जल से दूर होगी समस्या : दिनेश शास्त्री
तीर्थ पुरोहित दिनेश शास्त्री ने बताया कि विश्व के कोने-कोने से श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त पिंडदान कराने आते हैं, लेकिन सरस्वती सरोवर के गंदे जल को देखकर उनकी आस्था को गहरा धक्का लगता है। सरस्वती सरोवर का जल इतना गंदा हो चुका है कि श्रद्धालु यहां स्नान करने से भी कतराते हैं। हालांकि पिछली सरकार द्वारा जल संशोधन यंत्र भी लगवाया है, लेकिन जल की मात्रा अधिक होने के कारण जल संशोधन करना यंत्र की क्षमता से बाहर है। जब तक सरस्वती में बहते जल की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक तीर्थ में स्वस्छ जल सपने जैसा ही है।