निर्धारित तिथि से पहले आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करने पर करदाता को रिफंड से वंचित रहना पड़ सकता है। भारत सरकार के आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के अनुसार सभी करदाताओं को वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2016 की समाप्ति से पहले आयकर रिटर्न दाखिल कराना अनिवार्य है। तय तिथि निकल जाने के बाद निर्धारण वर्ष 2014-15 की रिटर्न फाइल एक्सेप्ट नहीं हो पाएगी। रिफंड का दावा भी मान्य नहीं होगा।
इंकम टैक्स, वैट एवं सर्विस टैक्स एडवाईजर एडवोकेट पृथ्वी नाथ गौतम ने बताया कि आयकरदाता निर्धारित तिथि से पहले पिछले दो वर्षों की रिटर्न दाखिल कर सकता है। इसमें निर्धारण वर्ष 2014-15 और 2015-16 को शामिल किया गया है। आयकर विभाग की ओर से करदाताओं से अपील की गई है कि अग्रिम टैक्स निर्धारण वर्ष 2016-17 से कोई देय बनता है तो करदाता वह भी 31 मार्च तक जमा करा सकता है। यदि अग्रिम टैक्स समय पर नहीं जमा कराया तो बाद में उस पर ब्याज देना पड़ेगा।
ट्रांजेक्शन पर पैन अनिवार्य
बैंक उपभोक्ताओं को ट्रांजेक्शन के लिए पैन का ब्यौरा देना अनिवार्य कर दिया है। इस बाबत भी सर्कुलर निकाला गया है। बताया गया है कि बैंकों में 50 हजार से अधिक कैश जमा कराने पर, पचास हजार रुपये से अधिक की एफडीआर कराना, जमीन-जायदाद मामले में दस लाख से अधिक रुपये का लेन-देन करने पर, शेयर मार्केट में अकाउंट खोलने पर, शेयर ट्रेडिंग व दो लाख से अधिक नगद आभूषण खरीदने इत्यादि मामलों में पैन की सही जानकारी जरूरी कर दी गई है। कहा गया है कि जानकारी न देने की स्थिति में उपभोक्ता का ही नुकसान होगा। डिफॉल्ट करने पर जुर्माना व टैक्स अदा करना पड़ सकता है।