भाखड़ा नहर के किरमिच हेड से पुलिस को एक क्षत-विक्षप्त शव मिला है। शव पांच छह टुकड़ों में बटा हुआ है, जिसके शरीर के सभी अंग अलग-अलग पड़े हुए थे। 19 दिन पहले आनंद विहार कॉलोनी मिर्जापुर के मोनू को दो दोस्तों ने भाखड़ा नहर में फेंक दिया था। भाखड़ा नहर से मिले शव को परिजन मोनू का शव मान रहे हैं, जबकि पुलिस इसे मोनू का शव मानने से इंकार कर रही है। पुलिस का कहना है कि डीएनए रिपोर्ट के बाद ही खुलासा होगा कि भाखड़ा नहर से मिला शव मोनू का है या किसी और का। पुलिस ने एफएसएल टीम से मौके से जरूरी सबूत भी एकत्रित करवाए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रोहतक के खानपुर कलां मेडिकल कॉलेज में भिजवा दिया है।
बता दें कि मोनू का सलेंद्र कुमार उर्फ प्रीतम निवासी डेरा बाजगीर गांव मिर्जापुर और संदीप कुमार निवासी डेरा बारना के साथ किसी बात को लेकर रंजिश थी। रंजिश को लेकर उनके बीच झगड़ा भी हुआ था। रंजिश के चलते 13 जुलाई को सलेंद्र व संदीप दोनों मोनू को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर कर्ण का टीला नहर की तरफ ले गए थे। पुलिस पूछताछ में युवकों ने खुलासा किया किया था कि उन्होंने मोनू को नहर में फेंक दिया था। इसके बाद पुलिस ने गोताखोरों की मदद से लगातार नहर में सर्च अभियान चलाया। थर्ड गेट पुलिस चौकी प्रभारी राजपाल सिंह ने बताया कि नहर से मिले शव के बारे में पुख्ता सबूत नहीं है कि यह शव मोनू का है। डीएनए रिपोर्ट के बाद ही शव की शिनाख्त का पता चलेगा।
परिजन अंडरवियर से कर रहे मोनू की पहचान
नहर में मिला शव इतना ज्यादा क्षत-विक्षत हो चुका है कि उसे देखकर नहीं बताया जा सकता कि यह किसका शव है, लेकिन परिजन शव पर मिले अंडरवियर को देखकर इस बात की पुष्टी कर रहे हैं कि यह मोनू का शव है।
कुत्तों ने नोचा शव, कर दिये छह टुकड़े
गोताखोर प्रगट सिंह ने कहा कि नहर में मिला शव मोनू का है इसके बारे में अभी पुष्टी नहीं की जा सकती। यह शव काफी दिन से साइफन में अटका हुआ है, जिसे आवारा कुत्तों ने बुरी तरह से नोचकर इसके कई टुकड़े कर दिए हैं। शव को बहुत से मुश्किल से नहर से बाहर निकाला गया। प्रगट ने कहा कि कोरोना महामारी में अब तक 32 शव नहर से निकाले हैं, जिसमें उनकी टीम नरेंद्र, गोपी, सींद्र, मामू राम शामिल रहे।