वह लोगों के घरों में जाकर काम करती रही, मजदूर परिवार में जन्मी बेटी को स्कूल की सूरत तक देखने को नहीं मिली। लेकिन सिलाई कढ़ाई का शौक भी और पढ़ने की ललक भी। पढ़ाई को अपने लिए सपना मान कर सिलाई की ओर ही ज्यादा ध्यान देती थी। लेकिन इसके नाप के लिए भी कम से कम अंकों का ज्ञान जरूरी था।
एक घर में काम करते हुए उसने मकान मालिक से गिनती सिखाने के लिए कहा ताकि मेजरमेंट टेप का ज्ञान हो सके। एक दिन में ही 50 तक गिनती सिख गई। इसके बाद शुरू हुआ पढ़ाई का सिलसिला...। यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। एक ऐसी बेटी की जो मजबूरी में घरों में काम तो करती ही थी, लेकिन लगन के चलते शिक्षा के क्षेत्र में विशेष प्रगति कर गई। इसी के चलते बुधवार को डीसी सुमेधा कटारिया ने भी आपकी बेटी हमारी बेटी उत्सव-2016 के तहत इस बेटी को सम्मानित किया।
समाज सेवी गुलशन ग्रोवर ने बताया कि सोनी उनके घर में काम करने आती थी। एक दिन उसने टेप को समझने के लिए गिनती सीखने की बात कही। जब उसे पहले ही दिन गिनती बताई तो वह एक दिन में ही 50 तक अंकों की पहचान सीख गई। तब लगा कि इस बच्ची को मौका मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसके बाद शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सोनी को स्कूल में दाखिल कराया गया। फिर सोनी नहीं रुकी और उम्र को दरकिनार करते हुए 6 वर्ष में ही उसने 12वीं कक्षा 76 प्रतिशत अंकों से पास कर ली। ग्रोवर बताते हैं कि सोनी के पिता दुर्विजय और माता राजकुमारी मजदूरी का काम करते हैं।
सोनी ने पढ़ाई के साथ-साथ काम करते हुए अपने परिवार की आर्थिक सहायता भी की है। वह अपनी इस सफलता का श्रेय भी ग्रोवर और उनकी पत्नी सविता ग्रोवर को देती हैं। ग्रोवर ने बताया कि सोनी को पढ़ाई की बहुत लगन है। वह अपने धुन की पक्की है। जो काम करने की ठान लेती है, उसे पूरा करके ही दम लेती है। उसकी इसी उपलब्धि के कारण उसे बुधवार को डीसी कटारिया ने सम्मानित किया। इस समारोह में उसने बड़ा आदमी नामक शीर्षक से एक कविता पढ़ी, जिसे सुनकर डीसी ने उसकी जमकर तारीफ भी की और उसे गले लगा लिया।