हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में चल रही पांच दिवसीय अंबाला मंडल की शास्त्रीय नृत्य कार्यशाला के तीसरे दिन प्रतिभागियों ने राग कल्याणी व आदि ताल के बारे में जानकारी हासिल की। भरतनाट्यम व कुच्चीपुड़ी नृत्य की कार्यशाला में महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में नटराजपूजन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।
मैक की भरतमुनि रंगशाला में कार्यशाला के प्रात:कालीन सत्र में भरतनाट्यम गुरु वाणी राजमोहन ने भरतनाट्यम नृत्य के माध्यम से गणेश वंदना प्रस्तुत की। जिसमें तुलसीदास द्वारा कन्नड़ भाषा में रचित गणेश के स्वरुप व कृत्यों का वर्णन किया। राग कल्याणी व आदि ताल में प्रस्तुत गणेश वंदना के बाद ऐश्वर्या रामाकृष्णन ने कुच्चीपुड़ी नृत्य के माध्यम से गणेशोकोत्तम प्रस्तुत कर भगवान गणपित के संदर्भ में बखान किया। गुरु वाणी ने बताया कि सभी शास्त्रीय नृत्यों में भरतनाट्यम सभी तरह की संभावनाएं रहती हैं। भरतनाट्यम नृत्य किसी भी भाषा में किया जा सकता है।
भरतनाट्यम के लिए केवल संगीत, मुद्राएं व भाव-भंगिमाओं की आवश्यकता है। उन्होंने भरतनाट्यम में श्रीरामचंद्रम के बारे में प्रस्तुतिकरण के माध्यम से बताया। वहीं तमिलनाडु के लोक नृत्य कावेड़ी सिंध के बारे में बताते हुए नृत्य प्रस्तुत किया। मैक के मुख्य सलाहकार महेश जोशी ने बताया कि कार्यशाला के समापन अवसर पर रविवार को सायं 3 बजे कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभागी अपनी प्रतिभा को दिखाएंगे तथा कार्यशाला में सीखे नृत्य गुरों का प्रदर्शन करेंगे।