पर्यावरण संरक्षण में कार्यरत ग्रीन अर्थ संगठन की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम की धारा 32 और 34 के तहत नगर परिषद को नोटिस जारी किया है। पिछले सप्ताह ग्रीन अर्थ ने प्रदेश पर्यावरण निगरानी कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रीतम पाल, जिला पर्यावरण समिति के अध्यक्ष एवं जिला उपायुक्त, जिला नगर आयुक्त तथा जिला वन अधिकारी को पत्र लिखकर पिपली स्थित कचरा डंप साइट से मुरझा रहे पेड़ों को तुरंत बचाने के लिए गुहार लगाई थी। पेड़ों को न बचाने तथा संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करने की सूरत में संगठन ने एनजीटी में याचिका डालने के बारे भी चेताया था। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए वन विभाग के अधिकारियों की देखरेख में नगर परिषद ने पेड़ों की जड़ों से कचरा तो साफ कर दिया है। हालांकि पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के लिए भारतीय वन अधिनियम की धारा 32 और 34 के तहत अधिकारियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।
संगठन सदस्य अधिवक्ता सुशील कुमार ने बताया की पिपली स्थित चिड़ियाघर के पीछे पवित्र नदी सरस्वती के किनारे डंप साइट में आए दिन आग लगी रहती है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खड़े पेड़ों की जड़ों में कचरे तथा आग से करीब 150 पेड़ मर चुके हैं तथा करीब 300 सूखने की कगार पर थे। कचरा डंप चिड़ियाघर में रह रहे जीव जंतुओं के लिए खतरा है तथा सरस्वती नदी को प्रदूषित कर रहा है। डंप का धुंआ राजमार्ग पर भयंकर सड़क दुर्घटना का भी कारण बन सकता है। म्युनिसिपल कौंसिल लगातार नियमों का उलंघन कर रही जो की पर्यावरण व लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है। वन विभाग के अधिकारी रविंद्र धनखड़ ने कहा कि इस बारे जिला नगर आयुक्त को पत्र लिखा गया है। फिलहाल पेड़ों के जड़ों में लगे गंदगी के ढेर को नगर परिषद ने साफ करा दिया है।