शाहाबाद। मीरी-पीरी संस्थान में जानकारी देते हुए हरभजन सिंह मसाना व अन्य।
- फोटो : samvad
शाहाबाद। एसजीपीसी के पूर्व सदस्य हरभजन सिंह मसाना ने कहा कि गत 21 अप्रैल को न्यायालय में मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े मामले की सुनवाई निर्धारित थी लेकिन उस दिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली तारीख 8 मई तय की गई है।
अन्य सदस्यों के साथ वीरवार को हुई बैठक में उन्होंने आरोप लगाया कि बलजीत सिंह दादूवाल की ओर से यह कहना कि मीरी-पीरी ट्रस्ट से स्टे हट चुका है और अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों की बहस हो चुकी है, पूरी तरह गलत और भ्रामक है। मसाना ने कहा कि यदि अदालत में कोई ऐसा निर्णय हुआ है तो दूसरे पक्ष के वकीलों को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। वास्तविकता यह है कि न्यायालय ने स्टे हटने से संबंधित कोई आदेश नहीं दिया। मसाना ने कहा कि सच्चाई यह है कि मामले में स्टे अभी भी बरकरार है और अगली सुनवाई 8 मई को होगी।
हरियाणा सिख पंथक दल के प्रदेश प्रवक्ता जगदेव सिंह गाबा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बलजीत सिंह दादूवाल की ओर से मीरी-पीरी ट्रस्ट के लिए लगातार गलत जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि एसजीपीसी इस प्रोजेक्ट पर लगभग 145 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, जबकि हरियाणा कमेटी का कुल बजट ही करीब 104 करोड़ रुपये है। गाबा ने दावा किया कि हरियाणा कमेटी चिकित्सकों का वेतन देने में भी सक्षम नहीं है, ऐसे में अस्पताल और मेडिकल कॉलेज को सुचारू रूप से तो बहुत दूर की बात है। गाबा ने दीदार सिंह नलवी पर परियोजना में बाधा डालने और निजी स्वार्थ के कारण सिख समुदाय को विभाजित करने का आरोप लगाया। इस दौरान ट्रस्ट के सीईओ संदीप इंद्र सिंह चीमा भी मौजूद रहे।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी की वकील दारिका सिक्का ने कहा कि अभी मामला न्यायालय में विचाराधीन है।