गांव समसपुर के तालाब से कई दिनों से छिपा हुआ खतरनाक मगरमच्छ आखिर रविवार की सुबह पकड़ में आ गया। पिछले 22 दिनों से इसे पकड़ने के लिए गोताखोर यहां सर्च अभियान चलाए हुए थे। वहीं, जाल में फंसाने के लिए रोजाना एक मछली रखी जाती थी। रविवार सुबह करीब पांच बजे जब मगरमच्छ इस मछली को खाने के लिए पानी से बाहर आया तो पहरे पर तैनात ग्रामीण ने तुरंत गोताखोर प्रगट सिंह को सूचित किया। टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे प्रगट सिंह पानी में उतरे और दो घंटे तलाश करते हुए करीब आठ बजे मगरमच्छ को काबू कर लिया। जाल में फंसने पर मगरमच्छ पकड़ छुड़ाने के लिए छटपटाता रहा, लेकिन प्रगट सिंह ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मगरमच्छ का मुंह अपने हाथों से पकड़ लिया और फिर उसे रस्सी से बांध दिया। मौके पर वन विभाग की टीम भी पहुंची, जिन्होंने पकड़े गए मगरमच्छ को भौर सैयदा स्थित मगरमच्छ प्रजनन केंद्र में छोड़ दिया। पकड़े गए मगरमच्छ की लंबाई छह फुट और वजन करीब 60 किलो है। वहीं, तालाब में अभी दो बड़े मगरमच्छ और होने की संभावना जताई जा रही है, जिन्हें भी सर्च अभियान चलाकर जल्द पकड़ लिया जाएगा।
गांव समसपुर में तीन चार एकड़ में फैले इस तालाब में गांव के पशुओं को नहलाने के लिए लाया जाता है। 26 जुलाई को एक ग्रामीण अपनी भैंसें यहां नहलाने के लिए लेकर आया था। तभी अचानक ने मगरमच्छ ने एक भैंस को अपने दांतों में जकड़ने की कोशिश, जिससे डर कर सभी भैंसे तालाब से बाहर आ गईं। मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ था। मगरमच्छ पकड़े जाने की सूचना जैसी ही ग्रामीणों तक पहुंची तालाब के आसपास भीड़ जमा हो गई। आस पास के गांव से भी कई लोग मगरमच्छ को देखने के लिए आ गए। मगरमच्छ को गाड़ी में भौर सैयदा लाया गया और प्रजनन केंद्र में छोड़ दिया। गोताखोर की टीम में प्रगट सिंह के साथ उनके गुरु सुरेंद्र और साथी नरेंद्र और सलिंद्र शामिल रहे।
इससे पहले 12 मगरमच्छ पकड़ चुके हैं प्रगट सिंह
गोताखोर प्रगट सिंह जहां अब तक करीब 18 हजार लोगों की जान बचा चुके हैं और हजारों की संख्या में लाशें नहर से बाहर निकाल चुके हैं। वहीं, उन्होंने अब तक 13 जिंदा मगरमच्छों को पकड़कर नहर और तालाब से बाहर निकाला है, जिसमें 11 मगरमच्छ कुरुक्षेत्र और दो रोहतक में निकाले। प्रगट सिंह को उनकी बहादुरी के लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।