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आंटी क्या पुलिस वालों को लाइसेंस मिला है ऐसी बर्बरता करने का

Tue, 20 Dec 2016 11:54 PM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
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women commision vice chairman - फोटो : अमर उजाला
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आंटी मेरा कसूर क्या था? क्या पुलिस वालों को लाइसेंस मिला है यह सब कुछ करने का? मुझे कान से अब तक ठीक से सुनाई नहीं दे रहा, क्योंकि पुलिस वालों ने एक के बाद एक मुझे इतने तमाचे मारे की मेरा कान सुन हो चुका है। कुरुक्षेत्र के एसपी दफ्तर में यह दर्द महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया के सामने रेनू मित्तल ने बयान किया।
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रेनू ने अपनी शिकायत में भी लिखा है कि देश के प्रधानमंत्री बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की बात करते हैं और पुलिस तंत्र बेटियों के साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है। रेनू ने महिला आयोग के समक्ष जब पूरी व्यथा सुनाई तो उस समय वे पुलिस वाले भी वहां मौजूद थे, जिन पर रेनू मित्तल, उसके पिता सतीश मित्तल, मां नीलम मित्तल और भाई प्रवीण पर बर्बरता बरतने के आरोप हैं। फफकते हुए रेनू ने महिला आयोग की उपाध्यक्ष को कहा कि आंटी इनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में अन्य पुलिस वाले और किसी के साथ ऐसा ना करते हुए डरें।

पुराने जख्म को याद करते हुए रेनू मित्तल एकदम इतने गुस्से में आ गई कि उसने यहां तक कहा कि अगर इन चारों आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं लिया गया, तो वह चुप नहीं बैठेगी, इन्होंने जिस ढंग से मुझे, मेरी मां और पिता एवं भाई के साथ जो व्यवहार किया, उसके लिए इन्हें सजा दिलाने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेगी। रेनू ने कहा कि हम तो साधारण लोग हैं, जब कुरुक्षेत्र और इस समय हरियाणा के मंत्री कृष्ण बेदी से बात करने को कहा तो इन्होंने एक के बाद एक उन्हें भी गंदी-गंदी गालियां देना शुरू कर दिया और आरोपी पुलिस वालों द्वारा मंत्री जी को दी गई यह सभी गालियां वीडियों में भी सुनाई दे रही हैं। महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने उन्हें आश्वासन दिया कि आयोग उनके और परिवार के साथ खड़ा है। उन्हें अवश्य न्याय मिलेगा और किसी भी दोषी को बक्शा नहीं जाएगा।       
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पुलिस वाले को नहीं है कोई गंभीर चोट : दहिया           
जहां पुलिस ने रविवार को एफआईआर दर्ज करते समय मीडिया को भेजी गई खबर में हवलदार दीपक की बाजू में फैक्चर की बात कही थी, उसका खंडन महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने किया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने रविवार की घटना के बाद जो मेडिकल कराया था, उसकी एमएलआर में किसी गंभीर चोट की पुष्टि नहीं होती। सुमन दहिया ने साफ किया कि रविवार को मित्तल परिवार पर जो गंभीर चोट मारने के आरोप लगाए गए हैं वे मेडिकल रिपोर्ट में सिद्ध नहीं होते।       

आज ही दर्ज होनी चाहिए एफआईआर           
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने डीएसपी जगदीश राय से सवाल किया कि जितनी तत्परता पुलिस की शिकायत पर मित्तल परिवार के
 खिलाफ मामला दर्ज करने में दिखाई गई थी, उतनी तत्परता मित्तल परिवार की बेटी की शिकायत पर क्यों नहीं दिखाई। इस पर डीएसपी बोले जांच कर रहे हैं। ये सुनते ही महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा कि मुझे जांच नहीं पहले एफआईआर दर्ज चाहिए और वो भी चारों के खिलाफ आज ही।       

महिला थाना से पुलिस क्यों नहीं बुलाई             
यदि कोर्ट का वारंट लेकर गए पुलिस मुलाजिम से अभद्रता और परेशानी महिलाओं द्वारा की गई थी, तो महिला थाना से पुलिस क्यों नहीं बुलाई गई? इस पर ना तो डीएसपी कोई जवाब सके और ना ही आरोपी पुलिस वाले और रिटायर्ड पुलिस एसोसिएशन। महिला आयोग के ऐसे कई सवाल थे, जिनके आगे पुलिस की घिग्गी बंधी रही। बता दें कि अमर उजाला ने आज उक्त मामले से संबंधित प्रमुखता के साथ प्रकाशित किए गए समाचार में महिला पुलिस का मुद्दा उठाया था।          
 
मैं बीए पास हूं अंडे के रेहड़ी लगाकर गुजारा कर रहा हूं     
महिला आयोग के समक्ष इस मामले से अलग यशपाल नाम का एक व्यक्ति भी पेश हुआ। इसने महिला आयोग की उपाध्यक्ष को बताया कि मैं बीए पास हूं और अंडे की रेहड़ी लगाकर गुजारा करता हूं, लेकिन उक्त चार आरोपी पुलिस वालों में से एक दीपक कुमार ने उसे भी बुरी तरह पीटा था। इसकी उसने शिकायत भी की है, लेकिन चौकी प्रभारी इस शिकायत पर समझौते का दबाव बना रहे हैं।       

तब इतनी जल्दी नहीं पहुंचती पुलिस            
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने आरोपी पुलिस वालों से पूछा मुलाजिम की सूचना पर जितने जल्दी चौकी प्रभारी सहित तीन पुलिस वाले सतीश मित्तल के घर पहुंच गए थे। क्या कोई महिला या अन्य नागरिक शिकायत करता है, तब इतने जल्दी नहीं पहुंचती पुलिस। एक पुलिस वाले ने कहा सर जी जाते हैं तब भी, महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा मैं 20 साल से क्रिमिनल लायर हूं, अच्छी तरह से जानती हूं।       

मैं समन नहीं वारंट लेकर गया था  
कोर्ट से वारंट लेकर गए एएसआई सतबीर सिंह से महिला आयोग ने सवाल किया कि ऐसे कैसे घर में घुस गए थे। एएसआई सतबीर बोला मैं समन नहीं वारंट लेकर गया था। इस पर दहिया ने कहा कि क्या वारंट लेकर ऐसे किसी के घर में घुस सकते हो। एएसआई ने कहा जी मैडम। दहिया ने कहा क्या घुस सकते हो? फिर एएसआई बोला जी मैडम। दहिया ने कहा मैं भी क्रिमिनल लायर हूं, ऐसे नहीं घुस सकते, खासकर तब जब वहां महिलाएं हों। आपके साथ महिला पुलिस होनी चाहिए थी। वैसे भी जिनके साथ आपने मारपीट की, उनमें से किसी की आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। चैक बाउंस का मामला भी उनके एक बेटे का है, जोकि उनके साथ नहीं रहता। हवलदार दीपक कुमार ने अपनी सफाई में महिला आयोग की उपाध्यक्ष को कहा हम तो ड्यूटी पर गए थे, मेरी गलती नहीं है। सुमन दहिया ने कहा कि अगर गलती नहीं है तो सस्पेंड क्यों किया तुम्हें। सस्पेंड महिला आयोग ने नहीं किया, मुख्यमंत्री ने किया है तुम्हे। इस पर पुलिस के वरिष्ठ मुलाजिमों ने हवलदार को दीपक को चुप रहने को कहा।       

जयहिंद का रिवाज नहीं है क्या          
पुलिस पर बुरी तरह भड़की महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने जब महिला थाना की एसएचओ को बुलाया तो वह सीधे आकर उनसे बोली जी मैडम। इस पर सुमन दहिया ने कहा कि क्या बात आपके यहां जयहिंद का रिवाज नहीं है क्या? दरअसल बगैर सैल्यूट किए महिला थाना की एसएचओ सीधे महिला आयोग की उपाध्यक्ष से मुखातिब हो गईं थीं। हालांकि महिला थाना प्रभारी ने कहा कि मैंने दफ्तर में एंट्री करते ही आपको सैल्यूट की थी, लेकिन आपने गौर नहीं किया।
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