लाडवा। कुरुक्षेत्र के लाडवा खंड के गांव बूढ़ा में एक पूरे परिवार ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतकों में परिवार का मुखिया और उसकी पत्नी सहित दो बच्चे शामिल हैं।
पति- पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बच्चों ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कुरुक्षेत्र के सरकारी अस्पताल भेज दिया है। इस घटना के बाद से मृतकों के परिजन गहरे सदमे में हैं, जबकि गांववासी सकते में हैं।
अभी तक आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। जानकारी के अनुसार आर्थिक तंगी से जूझ रहे गांव बूढ़ा के जितेंद्र कौशिक ने बुधवार देर रात को अपनी पत्नी सुषमा के साथ मिलकर आत्महत्या करने की योजना बनाई। दोनों ने मिलकर सुसाइड नोट लिखा। इसके बाद उन्होंने अपने दोनों बच्चों करीब 11 वर्षीया लड़की तेजस्वी व पुत्र करीब 8 वर्षीय शिवाशीष को जहरीला पदार्थ डेंगू की दवाई कहकर पिलाई और एक साथ जहरीला पदार्थ निगल लिया।
जहरीला पदार्थ पीने से परिवार को मुखिया जितेंद्र व उसकी पत्नी सुषमा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि लड़की की चंडीगढ़ पीजीआई और लड़के की कुरुक्षेत्र एलएनजेपी अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने बताया की देर रात को जब लड़के शिवाशीष के पेट में तेज दर्द व दस्त लगे तो लड़का जोर-जोर से चिल्लाने लगा।
लड़के की आवाज सुनकर उसक ी दादी व अन्य परिजन उठ गए और उन्होंने जब घर के अंदर जाकर देखा तो जितेंद्र, उसकी पत्नी सुषमा व लड़की तेजस्वी बेसुध पड़े थे, जबकि लड़का शिवाशीष दर्द से तड़प रहा था। उनके पास एक सुसाइड नोट लिखा पड़ा मिला।
जिस पर उन्होंने आत्महत्या करने की बात लिखी हुई थी। सुसाइड नोट पढ़कर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जितेंद्र व सुषमा की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस पर परिजन तुरंत दोनों बच्चों को लेकर लाडवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
कुरुक्षेत्र ले जाते समय लड़के शिवाशीष और लड़की तेजस्वी की चंडीगढ़ पीजीआई ले जाते समय मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही लाडवा पुलिस मौके पर पहुंची व मृतक के शवों व सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए कुरुक्षेत्र के लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल में भेज दिया।
एक साथ जलीं चिताएं
लाडवा के गांव बूढा में जहरीला पदार्थ निगलकर जीवनलीला समाप्त करने वाले चार सदस्यीय परिवार का वीरवार को गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
शाम को कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल से पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही चारों के शव गांव में पहुंचे वैसे ही वहां मौजूद परिजन व गांववासी सिसक उठे। शवों को अलग-अलग अर्थियों में श्मशानघाट ले जाया गया जहां मृतका सुषमा की अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए एक ही चिता बनाकर सभी शवों का एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा था परिवार
खंड के गांव बूढ़ा में जहर निगल कर जान देने वाला ब्राह्मण परिवार पुरोहित का दर्जा रखता है। इस परिवार के एक लड़के द्वारा अपने बीवी-बच्चों सहित आत्मघाती कदम उठाए जाने के बाद से गांववासी भी सकते में हैं। मरने से पहले परिवार के मुखिया व उसकी पत्नी ने मिलकर एक सुसाइड नोट लिखा।
सुसाइड नोट में परिवार के मुखिया जितेंद्र कौशल ने जहां स्वयं अपनी मर्जी से आत्महत्या करने की बात लिखी और अपने परिवार व सगे संबंधियों को बेकसूर ठहराया, वहीं सुसाइड नोट में मुखिया की पत्नी सुषमा ने अपने जेठ से उसके शव का शृंगार सुहागिन की तरह करने व सभी का अंतिम संस्कार एक साथ एक ही चिता में करने की बात लिखी। मृतका ने अपने गहने भी विभिन्न परिजनों को देने की बात लिखी हुई है।
हंसता-खेलता परिवार था जितेंद्र का
जितेंद्र कौशिक गांव बूढा के पुरोहित स्व. पंडित गुलाब चंद के पांच बेटों में चौथे नंबर पर था। जितेंद्र के सबसे बडे़ भाई राजेंद्र की भी मृत्यु हो चुकी है जबकि दो बडे़ भाई नवीन व प्रवीण व छोटा अजय नौकरी पेशा हैं। 41 वर्षीय जितेंद्र की शादी करीब 13 साल पहले सुषमा से हुई थी।
शादी के बाद उनके घर बेटी तेजस्वी पैदा हुई और बाद में बेटा शिवाशीष पैदा हुआ। बेटी तेजस्वी छठी में पढ़ती थी और बेटा चौथी कक्षा का विद्यार्थी था। बुधवार रात को पति-पत्नी ने अति दबाव में लिए गए गलत फैसले सेे अपने हंसते-खेलते परिवार का नामोनिशान मिटा डाला।
कम आमदनी से आर्थिक दबाव में था मृतक
मृतक जितेंद्र कौशिक आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। उसकी गांव में ही अपनी आटा चक्की थी, लेकिन उस आटा चक्की पर इतना काम नही था कि उसकी आमदनी से परिवार को पालन-पोषण पूरी तरह हो पाता। बच्चों को अच्छी परवरिश देने का ख्वाहिशमंद जितेंद्र कौशल कम आमदनी के कारण धीरे-धीरे आर्थिक दवाब में आ गया था।
इन दिनों वह काफी परेशान रहता था, लेकिन किसी को भी इस बात का अंदेशा नही था कि आर्थिक दवाब न झेल पाने पर इस परिवार का यह अंजाम होगा। गांववासियों के अनुसार समय-समय पर मृतक के भाई भी उनकी आर्थिक सहायता करते रहते थे। पर्याप्त आमदनी न होने से पति-पत्नी दोनों परेशान रहते थे।
जितेंद्र ने अपने बच्चों को पढ़ने के लिए लाडवा के नामी संजय गांधी स्कूल में दाखिला दिलाया था, लेकिन स्कूल की फीस व बच्चों की स्कूली जरूरतों को पूरा न कर पाने के कारण उसने दोनों बच्चों को वहां से हटाकर लाडवा के ही सुगनी देवी स्कूल में दाखिल कराया था। माना जा रहा है कि आर्थिक तंगी के चलते ही पति-पत्नी ने मिलकर यह कदम उठाया।
बच्चों को डेंगू की दवाई कहकर पिलाया जहरीला पदार्थ
मृतक जितेंद्र कौशल व उसकी पत्नी ने खाना खाने के बाद पहले अपने दोनों बच्चों को डेंगू की दवाई कहकर जहरीली पदार्थ पिलाया था। इस बात का खुलासा उनकी लड़की तेजस्वी ने अस्पताल में किया। तेजस्वी ने बताया कि उसके मम्मी-पापा ने उनको कहा कि आजकल डेंगू फैला हुआ है और यह उससे बचने की दवाई है। दोनों ने जहरीला पदार्थ डेंगू की दवाई समझकर पी लिया।
बच्चों के जहरीला पदार्थ पीने के बाद में दोनों पति-पत्नी ने भी यह पदार्थ पी लिया। जहरीला पदार्थ पीने से जितेंद्र व उसकी पत्नी सुषमा की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर अवस्था में दोनों बच्चों को अस्पताल लाया गया जहां लड़के शिवाशीष की कुरुक्षेत्र ले जाते समय व लड़की तेजस्वी की पीजीआई चंडीगढ़ ले जाते समय मौत हो गई।
पूरा परिवार एक-दूसरे से करता था बहुत प्यार
जितेंद्र कौशल का परिवार एक-दूसरे से बहुत प्यार करता था। दोनों पति-पत्नी आर्थिक संकट से निकलने के लिए प्रयासरत रहते थे। बताया जाता है कि इसके लिए मृतका सुषमा ने लाडवा के एक निजी स्कूल में शिक्षिका की नौकरी करके घर खर्च चलाने में अपने पति की मदद भी की।
आर्थिक मोर्चे पर विफल रहने पर दोनों ने मिल-बैठकर ही अपनी जान देने का कठिन फैसला लिया। यह फैसला लेने के बाद बच्चों के स्कूल की नोटबुक से पेज निकाल कर पहले तो पति ने आत्महत्या करने की बात लिखी और अपने हस्ताक्षर किए।
इसके बाद सुषमा ने भी हस्ताक्षर करके अपने जेठ से उसके शव का सुहागिन की तरह शृंगार करने की अंतिम इच्छा जाहिर की। आपसी प्यार के कारण ही सुषमा ने चारों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर करने की बात लिखी।
गांव में नही जला एक भी चूल्हा
गांव बूढा में पुरोहित परिवार के दर्दनाक अंजाम से परिजन ही सदमे में नही हैं, बल्कि पूरा का पूरा गांव ही मातम में डूबा हुआ है। घटना के बाद से पूरे गांव के किसी घर में चूल्हा तक नही जला है और गांववासी मृतक परिवार के संबंधियों को सांत्वना देने में जुटे हैं।
मृतक परिवार के शव जैसे ही गांव में पहुंचे चारों ओर कोहराम मच गया। मृतकों के रिश्तेदार बिलख रहे थे तो गांववासी उन्हें हालात का सामना करने का हौसला दे रहे थे। गांव के प्रत्येक निवासी की आंख नम थी। बेहद गमगीन माहौल में मृतक परिवार का गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
लाडवा के गांव बूढा के सरपंच मेघराज ने बताया कि मृतक परिवार की पारिवारिक स्थिती ठीक थी। उनके अनुसार परिवार की आर्थिक रूप से कमजोर पर वह कुछ नहीं कह सकते।