अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र-पिहोवा।
गांव सारसा में बुधवार को बेहद गमगीन माहौल में तीनों बच्चों को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। अंतिम यात्रा में विधानसभा में विपक्ष के उप नेता पिहोवा के विधायक जसविंद्र संधू, लाडवा विधायक डॉ. पवन सैनी, पूर्व वित्त मंत्री हरमोहिंद्र चट्ठा, पूर्व मंत्री बलबीर सैनी, भाजपा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर अखिल भारतीय खाप पंचायत महिला विंग अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया के साथ ही पूरे सारसा गांव के और अन्य गांव के निवासी भी बड़ी संख्या में पहुंचे। हर एक की आंख इस दौरान नम थी।
तीनों बच्चों के शव जैसे गांव पहुंचे माहौल गमगीन हो गया। परिजन बिलखने लगे। हर कोई बच्चों के अंतिम दर्शन करना चाहता था। घर की छतों, गलियों, दीवारों पर जिसे जहां स्थान मिला, वह वहीं से दर्शन करने लगा। अंतिम दर्शनों के बाद तीनों बच्चों के शव गांव सारसा के स्वर्ग धाम ले जाए गए। वहां पर दोनों लड़के समीर और समर के शवों को एक साथ एक चिता पर, जबकि लड़की सिमरन को दूसरी चिता पर दादा ब्लॉक समिति के पूर्व वाइस चेयरमैन राजेश मलिक ने मुखाग्नि दी। बता दें कि गत रविवार को तीनों बच्चे समीर (11 साल), सिमरन (7 साल) और समर (4 साल) गांव से लापता हो गए थे। दो दिन बाद उनके शव मंगलवार को मोरनी के जंगलों से बरामद हुए थे। बच्चों की गोली मारकर हत्या की गई थी। बच्चों की हत्या के आरोप में पुलिस ने पिता सोनू और सोनू के चचेरे भाई जगदीप को गिरफ्तार किया है।
साढ़े चार बजे पर गांव पहुंचे शव
सुबह से ही लोग बच्चों के शवों के इंतजार में थे। शाम साढ़े चार बजे एम्बुलेंस बच्चों के शव लेकर गांव पहुंची। उसे देखते ही लोग बच्चों के घर की चल पड़े। घर के प्रांगण में बच्चों के अंतिम दर्शनों के बाद उन्हें स्वर्गधाम ले जाया गया। करीब पांच बजे बच्चों के दादा (दादा का चचेरा भाई) राजेश ने मुखाग्नि दी।
पहले मांगी बच्चों की सुरक्षित लौटने की दुआ, अब बच्चों को मिले इंसाफ
ग्रामीणों का कहना है कि रविवार को बच्चे गांव से लापता हो गए थे। बच्चों की तलाश के लिए ग्रामीणों से दिन रात एक कर दिया। हर कोई बच्चों के सकुशल लौटने की दुआ कर था। बच्चों की मौत की सूचना मिलते ही गांव का माहौल गमगीन है। अब ग्रामीण इस हत्याकांड में शामिल लोगों को सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।
शव आने तक मां को नहीं पता था हत्या के बारे में
बच्चों की मां सुमन और दादी धन्नो का रो रोकर बुरा हाल है। अंतिम दर्शन के दौरान मां सुमन बेसुध हो गई। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनके बच्चे अब इस दुनिया में नहीं है। बच्चों के शव गांव में पहुंचने तक मां सुमन को इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी कि उसके बच्चों की हत्या कर दी गई है। बच्चों के शव आने के बाद बच्चों की मां सुमन को बताया गया कि उसके बच्चे अब नहीं रहे। यह बात सुनकर उसे विश्वास नहीं हुआ और बच्चों के अंतिम दर्शनों के दौरान वह बेसुध हो गई। बच्चों की दादी धन्नो का भी रो रोकर बुरा था।
हत्याकांड की चौतरफा निंदा
इस घिनौने हत्याकांड की पूरे में क्षेत्र में निंदा हो रही है। हर कोई इस हत्याकांड में शामिल आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे है। मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस घटना में किसी ने सोचा ही नहीं था कि हत्या के आरोपी बच्चो के पिता और चाचा ही हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस हत्याकांड की जमकर निंदा कर रहे है।
जगदीप छह दिनों के पुलिस रिमांड पर
पुलिस ने हत्याकांड के मुख्य अरोपी जगदीप मलिक को बुधवार को कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे छह दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि इस हत्याकांड में बच्चों का पिता भी शामिल है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।