कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में चंड़ीगढ़ के शिल्पकारों द्वारा बनाए गए नारियल व जूट
- फोटो : संवाद
कुरुक्षेत्र। बढ़ते प्रदूषण के कारण लुप्त हो रही गोरैया के संरक्षण के लिए शिल्पकार भी प्रयासरत हैं। वे इनके लिए नारियल व जूट के घोंसले बना रहे हैं, वहीं इनके जरिये इसे बचाने का भी संदेश दे रहे हैं।
चंडीगढ़ के शिल्पकार मामचंद के इन प्रयासों की हर कोई सराहना कर रहा है। उन्होंने ब्रह्मसरोवर के पूर्वी तट पर स्टॉल लगाया। जहां पर नारियल और जूट से तैयार किए गए घोंसलों को देख मेले के अंतिम दिन भी हर कोई ठहरता गया। मामचंद का कहना है कि आज के आधुनिक घरों में अब पक्षियों के लिए घोंसला बनाने की जगह कम पड़ रही है लेकिन अब लोग अपने घर की बालकनी व छत पर इन घोंसलों को लगा सकते हैं जिससे पक्षियों को एक आशियाना मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में उन्होंने इन घोंसलों की कीमत 100 रुपये रखी लेकिन उनकी ओर से 50 फीसदी छूट पर इन घोंसलों की कीमत 50 रुपये तय की गई, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इन घोंसलों को खरीद सके।
मामचंद बताते हैं कि इन घोंसलों की ऑनलाइन बिक्री भी हो रही है और लोगों में गोरैया को बचाने का जुनून बढ़ रहा है।
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में चंड़ीगढ़ के शिल्पकारों द्वारा बनाए गए नारियल व जूट- फोटो : संवाद