कांग्रेस का डीडी जल्द भाजपा में कैश हो सकता है। इशारा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर की ओर से डिमांड ड्राफ्ट करार दिए कांग्रेस के निवर्तमान जिलाध्यक्ष जयभगवान शर्मा डीडी की तरफ है।
डीडी ने सैकड़ों समर्थकों और पार्टी के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष, नगर पार्षद एवं केयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ नेता यशपाल नारंग सहित कांग्रेस को अलविदा कह दिया है।
जयभगवान शर्मा डीडी पिछले पांच वर्षों से लगातार जिलाध्यक्ष पद पर बने थे और सीएम हुड्डा के निकटतम जिलाध्यक्षों में उनका नाम शामिल था।
थानेसर विधानसभा सीट से कांग्रेस टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे डीडी का पार्टी को अचानक बाय-बाय करना कांग्रेस के लिए तगड़ा झटका है।
पिछले वर्षों में ऐसा कई बार हुआ जब सीएम हुड्डा व कांग्रेस की कई बड़ी हस्तियां डीडी के घरेलू कार्यक्रमों में शिरकत करतीं नजर आईं। कांग्रेस में डीडी के बढ़ते प्रभाव से कई पुराने कांग्रेसी भी असहज महसूस कर रहे थे।
क्योंकि 2009 में इनेलो से कांग्रेस में एंट्री करने वाले जयभगवान शर्मा डीडी को पार्टी ने सीधा जिलाध्यक्ष जैसा महत्वपूर्ण पद उनकी झोली में डाल दिया था।
डीडी सबसे ज्यादा तब सुर्खियों में आए, जब कुरुक्षेत्र में परिषद चुनाव के दौरान पंचायत भवन में इनेलो-कांग्रेस आमने सामने हुई।
मारपीट के हालात बनने पर डीडी ने इनेलो के कद्दावर नेता अभय चौटाला सहित अन्य कई बड़े नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
बता दें कि तत्कालीन कांग्रेसी जिलाध्यक्ष डीडी के पुत्र की सगाई देने के लिए उत्तराखंड के पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक एवं हरियाणा के भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा एवं कई दूसरे भाजपा नेता आए थे। डीडी का भाजपा में जाना लगभग तय है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने मोदी को आइडियल नेता बताया। शर्मा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मोदी देश के अच्छे दिन आवश्य लाएंगे।
उल्लेखनीय है कि लाडवा में गत दिनों कांग्रेस की रैली के दौरान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने अपने जिलाध्यक्ष जयभगवान शर्मा डीडी का नाम संबोधित करते हुए टिप्पणी की थी कि ये डीडी का मतलब क्या होता है भाई? शायद उस दिन तंवर या पार्टी के दूसरे नेताओं को ये मालूम नहीं था कि ये डीडी जल्द भाजपा में कैश हो सकता है।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और बुरा दौर
पिछले 25 सालों से जिला कांग्रेस के बुरे दौर की इबारत लिख गए। बता दें कि जयभगवान शर्मा डीडी ऐसे पहले जिलाध्यक्ष नहीं है, जिन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहा। उनके कार्यकाल सहित पिछले 25 वर्ष की अवधि में एक जिलाध्यक्ष को छोड़ शेष सभी जिलाध्यक्षों ने कांग्रेस में पहचान बनाई और बाद में अलविदा कहा। हालांकि इनमें से दो कांग्रेस में वापसी कर चुके हैं।
एक को छोड़ सभी ने पार्टी छोड़ी
24 जनवरी 1989 से 15 मई 1989 तक अध्यक्ष रहे सांसद तारा सिंह ने बाद में कांग्रेस को छोड़ा और इनेलो ज्वाइन की। 1991 तक जिलाध्यक्ष रहे पितांबर सैनी ने 1994 में कांग्रेस छोड़ कांग्रेस तिवारी के जिलाध्यक्ष बने।
हालांकि कई वर्षों से पितांबर कांग्रेस में वापसी कर चुके हैं। उनके बाद कुरुक्षेत्र में सबसे लंबे समय तक 1991 से 2006 तक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे पवन गर्ग ने पार्टी से किनारा किया और हजकां ज्वाइन की।
हालांकि 2010 में गर्ग भी कांग्रेस में वापसी कर चुके हैं। गर्ग के बाद 2006 से 2008 तक पूर्व मंत्री एवं तत्कालीन शाहाबाद के विधायक केएल शर्मा जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और उन्होंने भी 2013 में कांग्रेस छोड़ दी।
हालांकि केएल शर्मा के बाद 2008 में अध्यक्ष बने पूर्व विधायक साहेब सिंह सैनी अभी भी कांग्रेस में बने हैं। बता दें कि साहेब सिंह सैनी पहली और आखिरी बार 1982 में ताऊ देवीलाल की पार्टी से विधायक बने थे।
इसके बाद वे बंसीलाल की हविपा में रहते हुए थानेसर से विधानसभा का चुनाव भी लड़े और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। अब कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष डीडी ने पार्टी छोड़ने का इतिहास बरकार रखा है।
दिल्ली में मिले थे भाजपा दिग्गज से
डीडी के बेहद नजदीकी उत्तराखंड के नेता ने बताया कि पार्टी छोड़ने से पहले वह दिल्ली में पिछले कई दिनों से डेरा डाले हुए थे। उत्तराखंड कनेक्शन से डीडी की मुलाकात भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सहित भाजपा के कई दिग्गजों से मुलाकात हो चुकी है। यहीं से यस होने के बाद अचानक आज डीडी ने कुरुक्षेत्र में पार्टी छोड़ने का ऐलान किया।