कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते पवित्र ब्रह्मसरोवर के तट पर बुधवार को विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति के रंग बिखरे रहे। हिमाचल प्रदेश के नाटी, राजस्थान के चरी, उत्तराखंड के छपेली नृत्य से पूरा माहौल लोक सांस्कृतिमय हो गया।
छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने पंडवानी गायन से समां बांध दिया। अलग-अलग राज्यों की लोक संस्कृति को देख जहां बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटक गदगद हो उठे तो वहीं मिनी भारत का भी नजारा दिखाई दिया। पर्यटकों की भीड़ को देखकर लोक कलाकारों में भी उत्साह बढ़ा रहा।
महोत्सव के पहले दिन 28 नवंबर से राजस्थान के कलाकारों ने कालबेलिया व कच्ची घोड़ी, लखनऊ के कलाकारों ने मनिहार, उत्तराखंड के कलाकारों ने जौनसारी लोक नृत्यों से मंगलवार तक समां बांधे रखा। बुधवार को हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ, उत्तराखंड के कलाकार पहुंचे और दिनभर उनकी नृत्य शैली से ब्रह्मसरोवर के घाट गूंजते रहे।
पर्यटकों का न केवल भरपूर मनोरंजन हुआ बल्कि एक साथ विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति को देखकर वे गदगद नजर आए।