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Kurukshetra News: धर्मनगरी को स्वच्छता में प्रदेश का मॉडल बनाए जाने के दावे, पर कचरे के लिए स्थायी डंपिंग जोन नहीं

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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी को स्वच्छता में प्रदेश के लिए मॉडल बनाए जाने के दावे किए जा रहे हैं, जिसके चलते कई बार अभियान भी चलाए गए लेकिन ये दावे हकीकत में आने से अभी कोसों दूर दिखाई पड़ रहे हैं। नगर परिषद के पास आज तक न कचरा निस्तारण प्लांट है और न ही स्थाई डंपिंग जोन है। करीब एक साल से ब्रह्मसरोवर के पश्चिमी तट के समीप बनाए गए डंपिंग जोन पर भी सवाल उठने लगे तो मुख्यमंत्री नेे इसे बदले जाने के आदेश दिए लेकिन आज भी शहर का कचरा यहीं जमा किया जा रहा है।
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गत दिवस जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी यह मुद्दा उठा तो खाद् एवं पूर्ति राज्यमंत्री राजेश नागर ने भी जिला उपायुक्त को ब्रह्मसरोवर के समीप से डंपिंग जोन को हटाने के निर्देश दिए। ऐसे में अब नगर प्रशासन के पास यह डंपिंग जोन शिफ्ट करना चुनौती बन गया है।
जहां यह डंपिंग जोन ब्रह्मसरोवर से सटा हुआ है वहीं एक ओर बौद्ध स्तूप तो दूसरी ओर गुरुद्वारा दसवीं पातशाही व जगदगुरु ब्रह्मानंद आश्रम भी है। यही नहीं कुछ कदम की दूरी पर जिला नागरिक अस्पताल भी स्थित है। ऐसे में इस डंपिंग जोन को उचित नहीं माना जा रहा तो पहले भी कई बार शिकायतें अधिकारियों तक पहुंची। 10 दिन पहले चंडीगढ़ में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की बैठक में भी मुख्यमंत्री नायब सैनी व राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के समक्ष यह मुद्दा उठा। इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल डंपिंग जोन को हटाए जाने के आदेश दिए। इसके बावजूद अभी भी कचरा यहीं पर एकत्रित किया जा रहा है, जिसके चलते विधायक अशोक अरोड़ा ने शुक्रवार को हुई जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी राज्यमंत्री राजेश नागर के समक्ष यह मुद्दा उठाया। उन्होंने भी तत्काल ही जिला उपायुक्त को यह डंपिंग जोन हटाने के आदेश दिए।
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हर रोज निकल रहा 100 टन से ज्यादा कचरा



शहर से हर रोज 100 टन से ज्यादा कचरा निकल रहा है। नगर परिषद ने घर-घर से कचरा उठान के लिए निजी कंपनी को ठेका दिया हुआ है। घर-घर से कचरा एकत्रित कर टिप्पर ब्रह्मसरोवर के साथ बनाए गए डंपिंग जोन पर खाली किए जाते हैं, जहां से ट्रकों के जरिए यह कचरा करनाल स्थित प्लांट पर ले जाया जाता है।







ये किए जा चुके अब तक प्रयास



सबसे पहले नगर प्रशासन ने गांव मथाना में डंपिंग जोन बनाया था, जहां विरोध के चलते कई साल बाद हटाना पड़ा। इसके बाद गांव बाहरी के पास भी डंपिंग जोन बनाया गया तो वहां भी विरोध हो गया। यही नहीं इसी बीच कई गांव उमरी के समीप भी जगह चिह्नित की गई, जहां डंपिंग जोन बनाए जाने से पहले ही विरोध हो गया। ऐसे में लंबे समय तक कचरा कभी पिहोवा तो कभी निसिंग तक भी ले जाया जाता रहा तो बाद में ब्रह्मसरोवर के समीप डंपिंग जोन बनाया गया।





जल्द शुरू की जाएगी प्रक्रिया : डीसी



जिला उपायुक्त नेहा सिंह का कहना है कि डंपिंग साइट को किसी दूसरी जगह पर स्थापित करने के लिए जल्द प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए नगर व जिला प्रशासन बेहद गंभीर है।
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