किसान विश्राम गृह में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम को लेकर रणनीति बना रहे भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। दोपहर 1 बजे मंडलाध्यक्ष राकेश पुरोहित की अध्यक्षता में इस बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक की भनक लगते ही मौके पर पहुंचे किसानों ने पुलिस की मौजूदगी में मुख्य गेट को बंद कर भाजपाइयों को बंधक बना लिया। साथ ही विश्राम गृह की बिजली काट दी। इस दौरान किसानों ने विश्राम गृह में गंगाजल का छिड़काव किया और कहा कि भाजपाइयों ने उनका विश्राम गृह अपवित्र कर दिया इसे गंगाजल छिड़कर कर पवित्र करेंगे। यही नहीं वहां लगे सरकारी बैनर उखाड़कर किसान यूनियन का झंडा लगा दिया। किसानों के आक्रोश को देखते हुए अधिकतर भाजपाई पीछे के दरवाजे से निकल गए। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष राजकुमार सैनी, जिला प्रभारी मेहर चंद गहलोत, महामंत्री सुशील राणा सहित अन्य पदाधिकारियों को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में उनकी गाड़ी तक पहुंचाया गया।
किसानों नेताओं ने कहा कि प्रदेश भर में किसानों ने सरकार के राजनीतिक कार्यक्रमों के विरोध का ऐलान किया हुआ है, लेकिन नेता जानबूझकर कार्यक्रम कर रहे हैं। शुक्रवार को भी भाजपा के पदाधिकारी ने किसान विश्राम गृह में बैठक रखी हुई थी। किसान विश्राम गृह किसानों के लिए बनाया गया है, लेकिन भाजपा के कार्यकर्ता यहां एससी चलाकर बैठक करते हैं, जबकि दूसरी ओर किसान सड़कों पर भीषण गर्मी में तीन कृषि कानून के विरोध में आंदोलनरत हैं। ऐसे में कृषि कानून रद्द होने तक किसानों का विरोध जारी रहेगा। विश्राम गृह में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान डीएसपी गुरमेल सिंह ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान मानने को तैयार नहीं हुए। मौके से भाजपाइयों के जाने के बाद ही किसानों का गुस्सा शांत हुआ और विश्राम गृह की बिजली दोबारा शुरू की गई। डेढ़ घंटे के प्रदर्शन के बाद किसानों ने बैठक की तथा भाजपा के इस्माईलाबाद में होने वाले कार्यक्रम की सूचना वहां के किसानों को दी। उधर, हंगामे के बाद पिहोवा और बाखली मंडल की बैठक प्राची तीर्थ स्थित धर्मशाला में हुई और भाजपा पदाधिकारियों ने आगामी कार्यक्रम को लेकर रणनीति तय की।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए चंडीगढ़ से पहुंचे जिला प्रभारी मेहर चंद गहलोत ने प्रदर्शन कर रहे किसानों पर टिप्पणी कर दी। इसके बाद किसानों का गुस्सा भड़क गया। हालांकि बाद में गहलोत ने कहा कि हमें नहीं पता यह कौन लोग है। यह कांग्रेस पार्टी व कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा भेजे गए लोग है। किसान तो अपने खेतों में बिजी है।