थानेसर नगर परिषद द्वारा अवैध दूध की डेयरी चलाने वालों पर कोई कार्रवाई न करने का खामियाजा रोजाना हजारों शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। करीब चार बार सीएम विंडो में शिकायत व कष्ट निवारण समिति की बैठक में एक बार इन डेयरियों को शहर से बाहर ले जाने का मुद्दा उठ चुका है, लेकिन पिछले करीब 22 सालों से अवैध रूप से चल रही इन डेयरियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। शहर में इस समय 100 से भी ज्यादा अवैध डेयरियां चल रही हैं, जिनसे रोजाना हजार क्विंटल से ज्यादा गोबर निकलता है। डेयरी संचालक इस गोबर का सीधा नालियों में बहा रहे हैं, जिस वजह से नालियां अटी रहती हैं और कई बार तो ओवर फ्लो होकर सारी गंदगी सड़क पर फैल जाती है। इतनी बद्तर स्थिति के बावजूद स्थानीय प्रशासन और सरकार कुरुक्षेत्र को विश्व के मानचित्र पर स्थान दिलाने का दावा करती है। अवैध रूप से रिहायशी क्षेत्रों में चल रहीं ऐसी अनगिनत दूध की डेयरी के संचालकों पर एक्शन लेना तो दूर नगर परिषद के पास इनका सही आंकड़ा तक नहीं है। अब सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार नप ने इन डेयरियों का पंजीकरण करना शुरू किया है। 10 तारिख को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार 30 जनवरी तक इनका पंजीकरण किया जाएगा। वहीं नालियों में गोबर बहाने वाले डेयरी संचालकों के खिलाफ 10 हजार तक के जुर्माने के साथ-साथ छह माह की कैद भी हो सकती है। हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट 1973 के सेक्शन 135 और 158 के साथ अब बिना पंजीकरण के इधर उधर गोबर डाल रहे दूध डेयरी संचालकों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत भी कार्रवाई होगी। इतना ही नहीं एनजीटी एक्ट की अवहेलना करने पर डेयरी संचालक के पशुओं को नप किसी पंजीकृत गोशाला में भी छोड़ सकती है।
मसीता हाऊस, खातापुर मोहल्ला, पत्थरों वाली गली, अंचला चौक, दर्राखेड़ा, महादेव मोहल्ला, चौताला मोहल्ला, चक्रवर्ती मोहल्ला, राजेंद्र नगर, रेलवे रोड, पटेल नगर, न्यू कॉलोनी, कैलाश नगर, आजाद नगर, कल्याण नगर, शांतिनगर, पुराना बाई पास, शेख चहेली मकबरा वाली सड़क, अंचला चौक, झांसा रोड, मोहन नगर सहित कई अन्य क्षेत्रा में अवैध डेयरियां चल रही है।
महादेव मोहल्ला वासी सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि कई सालों से वह इस समस्या को झेल रहे हैं। ऐसा कोई अधिकारी नहीं जिसके आगे मोहल्ला वासियों ने इस समस्या को लेकर दुखड़ा न रोया हो, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। सुबह जब घर से बाहर निकलते हैं तो नाली में तैरती गंदगी के दर्शन होते हैं।
गृहणी सुशीला ने कहा कि वह बहुत परेशान हो चुके हैं। कई बार डेयरी संचलकों को मोहल्ला वासी टोच चुके हैँ। हर बार उन्हें सलाह देते हैं कि वह गोबर नालियों में बहाने की बजाए एक रेहड़ी या छोटी ट्रोली में एकत्रित कर लें और फिर उसे मोहल्ले से बाहर लेजाकर खाली प्लाट में डंप कर दें। इससे उनका काम भी हो जाएगा और मोहल्ला वासियों को भी कोई परेशानी नहीं होगी
शालीग्राम ने बताया कि वह इस समस्या को लेकर कष्ट निवारण समिति के समक्ष भी गुहार लगा चुके हैं। समिति के चेयरमैन राज्यमंत्री ने उन्हें अधिकारियों को समाधान करने के आदेश तो जारी कर दिए लेकिन फिर भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
महादेव मोहल्ला वासी राजकुमार ने बताया कई वर्ष पहले अवैध डेयरियों को लेकर वह कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। बाद में वो केस दफ्तर दाखिल हो गया। उस दौरान वह जब भी अधिकारियों के पास इस समस्या को लेकर जाते तो अधिकारी कोर्ट में मामला चलने की बात कहकर हाथ खड़े कर लेते ।
79 वर्षीय सतप्रकाश ने कहा कि नालियों से रोजाना गोबर के कारण इतनी दुर्गंध आती है कि यहां से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। उनके घर के आगे से नाली गुजर रही है इससे उठने वाली दुर्गंध ने उसे सांस का मरीज बना दिया है। कई बार तो इस दुर्गंध से बहुत ज्यादा दम घुटने लगता है।
श्रीराम ने कहा कि नालियों में डेयरियों से इतनी मात्रा में गोबर आता है कि यह हर दूसरे दिनव् अट जाती हैं। यदि किसी दिन बारिश हो जाए तो यह सारी गंदगी नाली से बाहर निकल सड़क पर फैल जाती हैं, जिससे वहां से निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
दुकानदार प्रेमलता ने कहा कि पिछले कई वर्षों से यहां ऐसे ही हालात हैं। अधिकारी उनकी बात सुनते ही नहीं है। जब कभी नप के कर्मचारी सफाई के लिए आते हैं तो गोबर नालियों से बाहर निकाल देते हैं। उस समय दुकान में बैठना दुबर हो जाता है। इस डेयरियों को रिहायशी एरिया से बाहर स्थापित करना चाहिए।
रविंद्र प्रसाद ने कहा नालियों में पड़े गोबर पर सारा दिन मच्छर मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं उसके बाद वहीं घरों में आकर बीमारियां फैलाती हैं। गोबर की दुर्गंध भी इतनी ज्यादा होती है कि घर में भी मुंह पर मास्क लगाकर बैठना पड़ता है।
मनोज कुमार ने कहा कि वैसे तो नालियों की सफाई बहुत कम होती है, लेकिन बार बार कहने पर जब नप सफाई कर्मी आकर नालियों से गोबर निकालकर जाते हैं तो वह दो घंटे के बाद से फिर गोबर के साथ भर जाती हैं। इस समस्या का जब तक कोई स्थाई समाधान नहीं होगा तब तक सभी को मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
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दुकानदार शिव ने कहा कि उनकी दुकान के आगे से नाली होकर गुजर रही है। डेयरी से आ रहा गोबर दिन रात नालियों में तैरता है। कई बार ओवर फ्लो होने से यह सड़क पर फैल जाता है। इस गंदगी के वजह से उनकी दुकानदारी बहुत ही ज्यादा प्रभावित होती है। इसकी शिकायत सीएम विंडो पर भी जा चुकी है।
विजय शर्मा ने कहा कि पीने के पानी का पाईप लाइन कई जगह से नालियों के नीचे से गुजर रही हैं। कई बार नलों में गंदगी युक्त पानी आता है, जिसमें से बहुत दुर्गंध भी आती है। शायद किसी जगह से पाइप लाइन लीक हो रही है, जिसमें से गोबर युक्त गंदा पानी उनके घरों में आ रहा है। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
कुलवंत गुप्ता ने कहा कि पार्षद उनकी समस्याओं का हल कराने की बात कहकर हर चुनाव में उनका वोट बटौर लेते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने डिसाइड कर लिया है, जो उसकी समस्या का समाधान कराएगा उनका वोट उसकी के पाले में जाएगा।
मोहन लाल सिंगला ने कहा कि नालियों में गोबर दो से तीन फुट तक जमा हुआ है। कभी कभार ही यहां सफाई होती है तो इसे निकाल दिया जाता है, लेकिन डेयरी संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती, जिसके चलते वह गोबर नालियों में बहाते रहते हैं और फिर से नालियां गोबर से अट जाती हैं।
थानेसर नगर परिषद के सेनेटरी इंस्पेक्टर संजय शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन अनुसार शहर में चल रही सभी अवैध डेयरियों का पंजीकरण किया जा रहा है। फिलहाल उनके पास करीब 96 डेयरी संचालक पंजीकरण के लिए आवेदन कर चुके हैं। वहीं 50-60 सक्षय युवा रोजाना फिल्ड में जाकर डेयरी संचालकों से पंजीकरण के फार्म भरवा रहे हैं।