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श्रद्धालुओं ने दिया अस्तगामी सूर्य को अर्ध्य

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पूर्वांचल समाज के लोगों का मुख्य त्योहार छठ पूजा धमर्नगरी में आज से शुरू हो गया। ब्रह्मसरोवर के मुख्य घाटों पर पानी की व्यवस्था न होने से नाराज श्रद्धालु ने पश्चिमी ओर के घाटों पर श्रद्धालुओं ने सांयकाल में अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य दिया।
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गौरतलब है कि कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर शहर व आस पास के अन्य शहरों से भी छठ पर्व मनाने प्रति वर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा किये गए इंतजाम से श्रद्धालु व छठ पर्व मनाने के लिए बनी सहयोगी संस्थाएं नाराज नजर आई। यहां आए श्रद्धालुओं ने अपने अपने रीति रिवाज से भगवान सूर्य की पूजा की। पंडित कमल भारद्वाज ने बताया कि महाभारत काल में द्रौपदी और पांडव द्वारा ऋषि धौम्या के कहे अनुसार सूर्य उपासना राज्य प्राप्ति के लिए की थी और उन्होंने छठपूजा अनुष्ठान के पश्चात ही राज्य भी प्राप्त किया था। वहीं इसके प्रमाण रामायण काल में श्रीराम व माता सीता के साथ भी जुड़े हैं कि माता जानकी ने भी इस अनुष्ठान को किया था। उन्होंने बताया कि भगवान सूर्य को प्राप्त इस पूजा में छिपते एवं उदयकालीन सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। ऐसा माना जाता है जो भी व्यक्ति इस दिन भगवान सूर्य की आराधना करता है वह विभिन्न बीमारियों से दूर हो जाता है।
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