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चरक संहिता चिकित्सा प्रधान ग्रंथ

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय में महर्षि चरक जयंती पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति डॉ. बलदेव कुमार ने महर्षि चरक के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की। उन्होंने चरक संहिता कहा कि चरक संहिता चिकित्सा प्रधान ग्रंथ है, जिसमें तत्कालीन प्रचलित सभी रोगों की चिकित्सा का वर्णन किया गया है और जिन रोगों का उल्लेख नहीं मिलता, उनकी चिकित्सा भी मार्गदर्शन चरक महर्षि ने किया है।
उन्होंने कहा कि चरक संहिता अपने आप में पूर्ण ग्रंथ है। जिसमें भूत-भविष्य और वर्तमान की व्याधियों का वर्णन मिलता है। दरअसल महर्षि चरक ने प्रकृति के तत्वों को आधार बनाकर चिकित्सा के सिद्धांत बनाए हैं। प्रकृति के सिद्धांत नित्य और शाश्वत होने से आयुर्वेद के सिद्धांत भी परिवर्तित नहीं होते। चरक संहिता के बहुत सारे उपलब्ध अनुवादों में काफी त्रुटियां हैं। उनमें संशोधन करने की आवश्यकता है, इसलिए चरक संहिता का अध्ययन प्रत्येक शब्द का अर्थ सहित करना चाहिए।
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श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना ने कहा कि महर्षि चरक के चिकित्सा पद्धति के नियम आज भी वैज्ञानिक दृष्टि से सर्वमान्य हैं। चरक संहिता सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। आयुर्वेद के भावी चिकित्सकों को महर्षि चरक के आदर्शों पर चलना चाहिए। अगर महर्षि चरक द्वारा बताए गए ऋतुचर्या, दिनचर्या के अनुसार मनुष्य आहार-विहार का पालन करता है तो वह कभी भी बीमार नहीं पड़ेगा। डॉ. प्रेमचंद मंगल ने गणमान्यों का धन्यवाद प्रकट किया। इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. शंभू दयाल, डॉ. राका जैन,डॉ. अनिल शर्मा, डा. जितेश कुमार पांडा,डॉ. अमित कटारिया, डॉ. दीप्ति पराशर, डॉ. सीमा, डॉ. आशु विनायक आदि मौजूद रहे।
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