कुरुक्षेत्र। वीरवार को दोपहर बाद अचानक बारिश आने से थानेसर अनाज मंडी में करीब दो लाख क्विंटल धान भीग गया। कहीं सुखाने के लिए बिछाई गई ढेरियां और कहीं उठान के इंतजार में ही रखी धान की बोरियां पानी में डूब गईं।
बारिश आते ही अनाज मंडी में अफरा-तफरी मची। हालांकि कुछ ढेरियों को आढ़तियों की ओर से ढका भी गया लेकिन अधिकतर खुले आसमान के नीचे भीगती रही। करीब आधे घंटे की बारिश से ही पूरी अनाज मंडी में पानी भर गया और ढेरियों से धान नालियों में बहने लगा। इसके चलते किसान भावुक व बेबस दिखाई दिए। बारिश थमी तो पानी निकालने का दौर शुरू हुआ। श्रमिक डूबी धान की ढेरियों को बचाने के लिए पानी से निकालने में लगे और कहीं नालियों में बहती धान को भी समेटने का प्रयास किया गया। उठान न होने के चलते अधिकतर नालियों के आसपास भी धान की ढेरियां व बोरियां लगाई गईं जिनमें अधिक नुकसान माना जा रहा है। बारिश होते ही धान खरीद भी थम गई। अब किसानों के समक्ष इस धान को फिर से सुखाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पहले ही मंडी अटने लगी थी और अब गीले धान को सुखाने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में किसानों को नुकसान की चिंता और बढ़ गई है। बुधवार देर शाम तक थानेसर मंडी में 32,636 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है।
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इस नुकसान का जिम्मेदार कौन : बलकार सिंह
भौर सैयदा गांव के किसान बलकार सिंह का कहना था कि वह सात एकड़ की फसल लेकर दो दिन से आया हुआ है। माॅइश्चर अधिक बता दिया गया तो यहां मंडी में धान को सुखाया। इसी के ऊपर बारिश हो गई जिससे यह पूरी तरह भीग गया है। अब यह अगले एक सप्ताह तक भी सूख नहीं पाएगा। गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में अब इस नुकसान का कौन जिम्मेदार होगा। किसान पहले ही प्राकृतिक मार झेल रहे थे। कड़ी मेहनत कर धान तैयार किया तो यहां अनाज मंडी में भी यह दुर्दशा हो गई।
मार्केट सचिव बोले, अचानक हुई तेज बारिश
मार्केट कमेटी सचिव हरजीत सिंह का कहना है कि मंडी में खरीद व उठान कार्य सुचारू चल रहा था। अचानक तेज बारिश हुई जिससे धान भीगा है। सभी नालियां साथ ही खुलवा दी गईं, ताकि पानी आगे बह सके। नुकसान के बारे में अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है। उन्होंने माना कि बारिश के दौरान मंडी में करीब दो लाख क्विंटल धान था।
डीएफएससी बोले, यह आढ़तियों की जिम्मेदारी
डीएफएससी राजेश आर्य का कहना है कि खरीद की जा चुकी धान को ढकने व संरक्षित रखने की जिम्मेदारी आढ़ती की होती है। बारिश से ये हालात क्यों बने, इस संबंध में अधिकारियों व आढ़तियों से जानकारी ली जाएगी। आगे भी ऐसे धान न भीगे, इसके लिए पुख्ता प्रबंध करवाए जाएंगे।
उठान में लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई : डीसी
जिला उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा का कहना है कि बुधवार देर शाम तक 1,77,434 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। इस सीजन में खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से 1,45,732 और हैफेड ने 31,702 एमटी धान का खरीद कार्य किया है। खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से 51 प्रतिशत व हैफेड की ओर से 46 प्रतिशत धान का उठान कार्य किया जा चुका है। उठान में लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कुरुक्षेत्र बारिश के चलते थानेसर आनजमंडी की नालियों में इस तरह बहती रही धान। संवाद
कुरुक्षेत्र बारिश के चलते थानेसर आनजमंडी की नालियों में इस तरह बहती रही धान। संवाद
कुरुक्षेत्र बारिश के चलते थानेसर आनजमंडी की नालियों में इस तरह बहती रही धान। संवाद
कुरुक्षेत्र बारिश के चलते थानेसर आनजमंडी की नालियों में इस तरह बहती रही धान। संवाद
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कुरुक्षेत्र बारिश के चलते थानेसर आनजमंडी की नालियों में इस तरह बहती रही धान। संवाद
कुरुक्षेत्र बारिश के चलते थानेसर आनजमंडी की नालियों में इस तरह बहती रही धान। संवाद