कुरुक्षेत्र। जिले में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है। चिकित्सकों के अनुसार लगभग 40 फीसदी महिलाओं को गर्भधारण करने में किसी न किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, मानसिक तनाव और शारीरिक गतिविधियों में कमी को इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
अस्पतालों के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में इन दिनों ऐसे दंपतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो शादी के 13 से 14 वर्षों बाद भी संतान सुख से वंचित हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार हर माह दर्जनों नए मामले परामर्श और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाएं शामिल हैं।
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10 साल पहले हुई शादी नहीं बनी मां
शहर वासी एक महिला ने बताया कि उनकी 2016 में शादी हुई थी लेकिन अभी तक भी उन्हें कोई संतान नहीं हुई। कई बार चिकित्सकीय परामर्श ले चुके हैं।
2013 में हुई शादी, नहीं हुई संतान
कुरुक्षेत्र के निकटवर्ती गांव की 40 वर्षीय महिला ने बताया कि उनकी 13 साल पहले शादी हुई थी। दो साल तक उन्होंने प्लानिंग नहीं की। उसके बाद से गर्भ धारण करने में परेशानी आ रही है। कई सालों से चिकित्सक से दवा ले रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई फर्क नहीं पड़ा।
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सामाजिक दबाव व जानकारी के अभाव में नहीं कराते इलाज : डॉ. रजनी गुप्ता
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी गुप्ता का कहना है कि पहले जहां विवाह के एक-दो वर्ष बाद गर्भधारण न होने पर दंपती चिकित्सकीय सलाह लेते थे, वहीं अब कई परिवार सामाजिक दबाव या जानकारी के अभाव में वर्षों तक उपचार नहीं कराते। जब समस्या जटिल हो जाती है, तब वे अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे मामलों में हार्मोनल असंतुलन, थायरॉइड की समस्या, पीसीओडी ( पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज ), मोटापा और एनीमिया प्रमुख कारणों के रूप में सामने आ रहे हैं।
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ये भी है मुख्य कारण
युवतियों में फास्ट फूड का अधिक सेवन, अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना और शारीरिक श्रम की कमी सीधे तौर पर प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा बढ़ता मानसिक तनाव, कॅरिअर की चिंता और देर से विवाह की प्रवृत्ति भी गर्भधारण में देरी का कारण बन रही है। कई मामलों में पुरुषों में भी शुक्राणुओं की कमी या गुणवत्ता में गिरावट पाई जा रही है।
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बांझपन से बचाव के लिए जीवनशैली बदलें
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम ने कहा कि महिलाओं को संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने, पर्याप्त नींद लेने और तनाव से दूर रहने की सलाह दी जाती है। आयरन, कैल्शियम और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को दैनिक जीवन में शामिल करने पर जोर दिया गया है। साथ ही विवाह के बाद यदि एक वर्ष तक गर्भधारण न हो तो दंपती को बिना झिझक चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।